
आज भक्त कथा के सप्तम दिवस पर ग्रंथ पूजन आरती महंत राम प्रियदासजी, महंत प्रेम नारायण दास जी समाजसेवी श्रीमती अनुराधा शर्मा विधायक रवि शर्मा ,पीके वर्मा, सुशील शर्मा प्रदीप दीक्षित दुनिया की तत्पश्चात प्रवचन करते हुए हरिवंश दास जी ने कहा कि गोस्वामी जी ने कहा बंदऊ प्रथम भरत के चरणा आखिर क्यों जबकि पहले को ब्रह्मण आदि वंदना कर चुके हैं मनु जी की तपस्या में ब्रम्हा विष्णु, महेश तीनो त्रिदेव आये पर मनु जी ने कोई वरदान नही मांगा।भगवान ने अर्जुन से कहा कि में ही करता हु,में ही भरता हु,ओर में ही श्रष्टि का हर्ता भी हु।ओर में अकर्ता भी हु।पुराण में ईस्वर का लक्षण यही लक्षण है।में ही अणु हु में परमाणु हु ।रामदास गोघाना जी गोपाल जी के बहुत ही ख्याति प्राप्त भक्त हुए वह एकादसी को बैलगाड़ी से द्वारिकाधीश के दर्शन हेतु जरूर जाते जब वह बृद्ध हो गए तो उनसे अब बैल नही चलते फिर भी वह किसी तरहः एकादसी को पहुच ही गए।तो द्वारिका धीश उनसे बोलने लगे कि अब आप बृद्ध हो गए अब आप घर से ही भजन करो।पर जैसे ही एकादसी आयी वह फिर दर्शन को पहुच गए,द्वारिकाधीश बोले तुंम फिर आ गए।तो वह बोले रामदास गोदाना चलो आपके साथ ही चलते है तुंम तो मानोगे नही ।ओर द्वारिकाधीश उनके साथ उनकी बैलगाड़ी पर बैठ गए।और उनके घर चल दिये।जब सुवह गोस्वामी जी ने देखा तो द्वारिकाधीश नदारत,तभी कहा की वह रामदास गोंडाना ही चुरा ले गए,तुरन्त घोड़े दौड़ाए गए।और गोड़ाना जी से द्वारिकाधीश बोले मुझे तालाब में छुपा दो,सैनिक आये गोड़ाना को मार मार कर लुहूँलुहान कर दिया तभी देखा कि तालाब से खून जैसा लाल उतराने लगा तो लोग बोले यही छुपाया होगा,जब देखा तो भगवान ही थे फिर पूछा ये लाल लाल रक्त कैसा सैनिकों से बोले तुंम लोग ही मार रहे हो और तुम लोग ही पूछ रहे हो कि खून कैसा।सैनिक बोले महाराज हंमने तो रामदास गोड़ाना को पीटा है आपको तो छुआ ही नही ।तब भगवान बोले तुंम भक्त और मुझमें कैसे भेद कर सकते हो तुमने मारा मेरे भक्त रामदास को हे पर चोट मुझे ही लगी है ।तब मंदिर के पुजारी याचना करने लगे कि महाराज छमा करे,ओर अब लौट चलिए ,पर द्वारिकाधीश बोले हम तो रामदास के साथ ही जायेंगे।तब सब याचना कर अपने अपराध की छमा मांगने लगे तब द्वारिकाधीश बोले कि छमा रामदास गोदाना से मांगो तब सबने उनके चरण पकड़कर माफी मांगी ।फिर द्वारिकाधीश बोले ठीक है हम दिन भर तो द्वारिका रहेंगे पर शयन रामदास के घर ही आएंगे इस पर सहमति बन गयी और द्वारिकाधीश दिन भर द्वारिका रहते,ओर रात्रि में रामदास गोडाना के घर शयन करने लगे । अनेकों पद एवं भजन के माध्यम से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया कथा समापन का आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे राजकुमार गोस्वामी नीरज राय गिरिजा तिवारी आशीष चंद्र शर्मा आशीष रिछारिया मोती प्रजापति सर्वेश पटेल अंचल अरजरिया अनिल अरजरिया उषा नायक गौरी शंकर दुबे राजेंद्र गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

