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भगवान अपने साथ हुआ अपराध तो माफ कर देते हैं पर भक्त का अपराध माफ नहीं करते श्री महंत मदन मोहन दास जी महाराज 

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झांसी। प्रभु श्री राम कहते हैं “जो अपराध भक्त कर करहूं राम रोस पावक सो जरहूं ”

माता जानकी ने लक्ष्मन जी से कटु ओर निंदनीय शब्द बोले जब मारीच रूपी हिरन ने है लक्ष्मण की छल से आबाज लगाई, तब सीता जी ने लक्ष्मण से कहा राघव आपको पुकार रहे है ।पर लक्ष्मण बोले ऐसा कोंन है जग में जो रघुराई को पराजित कर सके,तभी सीता माता बोली मेरे पति संकट में है,ओर तुंम बहाने बना रहे हो,तुम्हारी नियति में खोट दिख रही है । यह वात हनुमान जी जब लंका गए तब जानकी जी ने हनुमान जी को बताई,चुकि लक्ष्मण प्रभु के प्रिय भक्त है और राघव अपने भक्त पर किये गए अपराध को भूलते नही।उसी का परिणाम आज मुझे मिला है ,में अपने प्रियतम से दूर हु,यह सब मुझे राघव की दी हुई सजा है । अतः हम सभी को प्रयास करना चाहिए संत साधु भक्त ब्राह्मण का अपमान कभी नहीं करना चाहिए भक्ति की चर्चा करते हुए हनुमान जी के चरित्र की व्याख्या की आगे उन्होंने कहा की ब्रह्मा जी ही नाभाजी के रूप में प्रकट हुए हैं और उन्होंने सरल शब्दों में कलयुग के लोगों के लिए भक्तमाल ग्रंथ की रचना की है प्रयास करना चाहिए कि प्रतिदिन भक्तमाल का पाठ अवश्य करें प्रारंभ में ग्रंथ की आरती महंत प्रेम नारायण दास विष्णु राय दिलीप तिवारी महेश शर्मा सर्विस पटेल अमित गोस्वामी नीरज राय ने की आगे बोलते हुए कहा कि विपत्ति में भगवान का सुमिरन होता है इसीलिए माता कुंती ने भगवान से विपत्ति मांगे भगवान का भजन ही हमारा कल्याण करने वाला है। आखरी में आरती महंत राम प्रिया दास जी, राजेंद्र, अरुण शर्मा, सुशील शर्मा, मंजू अड़जरिया, आस्था अरजरिया केके दुबे गुड्डू शर्मा ने की।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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