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एएचएम (कृषि-पारिस्थितिक गृहवाटिका मॉडल ) मॉडल को समझने टहरौली-गरौठा तहसील के विभिन्न गांवों के किसानों ने किया एक्सपोजर विजिट

टहरौली/गुरसराय/गरौठा ( झांसी ) बुंदेलखंड में कृषि को टिकाऊ एवं जलवायु अनुकूल बनाने तथा किसानों को नई कृषि पद्धतियों से परिचित कराने के उद्देश्य से इक्रिसेट द्वारा टहरौली एवं गरौठा तहसील के विभिन्न गांवों के किसानों के लिए एग्रो इकोलॉजिकल होमस्टेट मॉडल पर आधारित एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। इसमें दोनों तहसीलों के अलग-अलग गांवों से आए किसानों ने सहभागिता की।इस एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य किसानों को एग्रोइकोलॉजिकल होमस्टेड मॉडल की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना था। इस मॉडल को आई डब्ल्यू एम आई ( अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान ) एवं प्रदान एनजीओ के सहयोग से तैयार एवं विकसित किया गया है, जबकि किसानों के इस एक्सपोजर विजिट का आयोजन इक्रीसेट द्वारा किया गया। इसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। इसकी जगह जैविक खाद, केंचुआ खाद ( वर्मिकंपोस्ट ) और प्राकृतिक कीट नियंत्रण का उपयोग होता है। एक ही खेत में केवल एक फसल उगाने के बजाय फल, सब्जियां, औषधीय पौधे, अनाज और पेड़-पौधे एक साथ उगाए जाते हैं।ए एच एम मॉडल के अंतर्गत कृषि को अधिक विविधतापूर्ण एवं टिकाऊ बनाने के लिए खेती के साथ फल-सब्जियों का उत्पादन, पेड़-पौधों का समावेश, पशुपालन तथा जल एवं मृदा जैसे प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग पर ध्यान दिया जाता है। इस तरह की कृषि प्रणाली का उद्देश्य किसानों के उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, आजीविका के विभिन्न विकल्प विकसित करना तथा कृषि को बदलती जलवायु की परिस्थितियों के अनुकूल बनाना है।एक्सपोजर विजिट में टहरौली एवं गरौठा तहसील के विभिन्न गांवों से शामिल हुए किसानों को मॉडल के विभिन्न पहलुओं को समझने और अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार इसकी संभावनाओं पर विचार करने का अवसर मिला। इस दौरान किसानों के बीच कृषि संबंधी ज्ञान एवं अनुभवों का आदान-प्रदान भी हुआ।बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षा की अनिश्चितता, जल उपलब्धता और खेती से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों को देखते हुए इस प्रकार की पहल किसानों को कृषि की विविध एवं टिकाऊ पद्धतियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।इक्रिसेट द्वारा आयोजित यह एक्सपोजर विजिट किसानों तक उपयोगी कृषि ज्ञान पहुंचाने और विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों के माध्यम से टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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