झाँसी। पूर्व सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर), नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डॉ. मंगला राय ने मंगलवार को रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह एवं अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विश्वविद्यालय में स्थापित विभिन्न प्रयोगशालाओं, इकाइयों तथा कृषि प्रक्षेत्रों का अवलोकन किया। कृषि मंडपम सभागार में डॉ. राय ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं कृषि विकास संबंधी गतिविधियों की सराहना करते हुए भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।डॉ. मंगला राय ने वर्तमान बदलते वैश्विक परिदृश्य में कृषि एवं इससे संबंधित विधाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की विशाल आबादी, पशुधन और सीमित प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर एक प्रभावी रोडमैप तैयार करना होगा। उन्होंने खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को एक-दूसरे से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।उन्होंने संसाधनों के कुशल उपयोग, कृषि अनुसंधान को व्यावहारिक स्वरूप देने और वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में बेहतर समन्वय और दीर्घकालिक रणनीति से ही आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान की जा सकती है।डॉ. राय ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कृषि अनुसंधान की बदलती आवश्यकताओं और भविष्य की कार्यप्रणाली पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार, अनुसंधान और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई, ताकि बदलते परिवेश में देश की कृषि व्यवस्था को अधिक सक्षम और टिकाऊ बनाया जा सके।उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों एवं अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन करते हुए वहाँ संचालित कार्यों की प्रशंसा की तथा भविष्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाएँ बनाने पर जोर दिया।इस अवसर पर विवि के सभी अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक एवं विधार्थी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा
