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धमकाने पर न्यायालय ने जमानत पर छुटे आरोपी की जमानत खारिज की

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झांसी। छेड़खानी के मुकदमे में राजीनामा नहीं करने ओर पीड़िता को सरेराह धमकाने तथा दबाव बनाने के लिए न्यायालय में पीड़िता ओर उसके परिजनों के खिलाफ लगातार झूठे मुकदमे दर्ज कराने के प्रार्थना पत्र देने के आरोप में न्यायालय ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए न्यायालय विशेष न्यायाधीश पोस्को एक्ट मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने जमानत खारिज कर अभियुक्त की जमानत खारिज कर उसे तीन दिन के अंदर न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।

अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे विशेष शासकीय अधिवक्ता विजय सिंह कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना मऊरानीपुर वर्ष 2023 में पीड़िता ने एक मुकदमा दर्ज कराते बताया था कि आरोपी मऊरानीपुर निवासी लक्ष्मी कांत कोरी उर्फ लला ने उसके साथ छेड़खानी करते हुए जान से मारने की धमकी दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। इसके बाद न्यायालय से आरोपी जमानत था। पीड़िता ने न्यायालय अभी हाल ही में दिए शिकायती पत्र में बताया कि आरोपी मुक़दमे में राजीनामा नहीं करने पर उसके व उसके परिजनों के खिलाफ कई शिकायती पत्र न्यायालय में 173/4 में दे चुका है। जिसमें न्यायालय ने उसके सभी प्रार्थना पत्र झूठे मानते हुए निरस्त कर दिए है। वही पीड़िता ने आरोप।लगाया कि 10 अप्रैल 2026 को वह बाजार गई थी जहां आरोपी ने उसे घेर लिया ओर उसे धमकाते हुए गाली गलौज कर उसे मुकदमे में गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी। अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता विजय सिंह कुशवाह ने न्यायालय से आग्रह किया कि अभियुक्त पर दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज है, यह जमानत पर रहकर साक्ष्यों ओर साक्ष्य को प्रभावित कर रहा है। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी को पूर्व में दी गई जमानत खारिज करते हुए आरोपी को तीन दिन के अंदर न्यायालय में समर्पण करने के निर्देश दिए है।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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