झाँसी। मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित लगभग 500 फीट ऊंची प्राकृतिक और ऐतिहासिक कैमाशन पहाड़ी पर अवैध कब्जों और निर्माण कार्यों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एनजीटी में चल रही सुनवाई के दौरान लगातार मिल रहे स्थगन इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि इस बेशकीमती विरासत की लूट को अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। एक तरफ सरकार सरकारी जमीनों को कब्जा-मुक्त कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ लगातार पहाड़ी को काटकर अतिक्रमण किया जा रहा है। वही इस धरोहर को बचाने की गुहार लगाने वाले अनशन कर रहे आंदोलनकारियों को कथित तौर पर फर्जी मुकदमें लगाकर अनशन करने से रोका जा रहा है।*राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप*बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता भानु सहाय ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों की साठगांठ से इस प्राचीन पहाड़ी को अवैध रूप से काटकर वहाँ नर्सिंग होम और बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जो बिना राजनीतिक सहयाग के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार जनहित और संरक्षण के दावे करती है, वहीं धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।*एनजीटी में सुनवाई टलने से बढ़ा आक्रोश*इस मामले में अधिकारियों की संलिप्तता के ठोस प्रमाण NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं। साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए NGT ने गत 21 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के कड़े निर्देश दिए थे।आरोप है कि अपनी कारगुजारियों को छिपाने के लिए हर बार नए बहाने बनाकर सुनवाई को टाला जा रहा है। हद तो तब हो गई जब 16 अक्टूबर 2026 की निर्धारित सुनवाई के दौरान भी पूर्व की भांति चिकित्सा और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर स्थगन ले लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप अब इस अहम मामले में सुनवाई हेतु अगली तारीख दे दी गई है।*आर-पार की लड़ाई का ऐलान*बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय ने दो टूक चेतावनी दी है कि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहर को लीलने वाले भ्रष्ट तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मोर्चा इस अवैध कब्जे और लूट के खिलाफ अपने कानूनी संघर्ष के साथ-साथ जन-आंदोलन को और अधिक तीव्र करेगा।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा
