झांसी। जनपद के थाना रक्सा से जुड़ा एक चर्चित प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। मामले की क्षेत्राधिकारी नगर, झांसी द्वारा विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए तथा सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, वीडियो साक्ष्यों एवं अन्य उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच पूर्ण होने पर शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोपों की पुष्टि होने के उपरांत जांच आख्या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, झांसी को प्रेषित की गई।
जांच आख्या के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, झांसी द्वारा “अभियोग अनुमति-निर्देश” जारी करते हुए संबंधित रक्सा थाना प्रभारी को विधिसम्मत कार्यवाही एवं एफआईआर पंजीकृत करने हेतु निर्देश दिए गए। यह आदेश 01 अगस्त 2026 को जारी हुआ तथा 03 अगस्त 2026 को संबंधित थाने में प्राप्त भी हो गया। इसके बावजूद आज तक थाना स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता द्वारा उच्च अधिकारियों को ई-मेल, पंजीकृत डाक, जनसुनवाई पोर्टल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से भी लगातार प्रकरण से अवगत कराया गया है। इसके बाद भी थाना स्तर पर आदेशों का पालन न होने से मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब क्षेत्राधिकारी स्तर की जांच पूरी हो चुकी है, सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि हो चुकी है तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा “अभियोग अनुमति-निर्देश” भी जारी कर दिए गए हैं, तब भी संबंधित थाना प्रभारी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कर रहे हैं? यह प्रश्न अब आमजन के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

