झांसी। दो माह पूर्व सट्टा माफिया की थार गाड़ी से पूर्व सहायक कुलपति को कुचलने वाले पुलिस सेवा से बर्खास्त सिपाही रजत को जमानत देने से न्यायालय विशेष न्यायाधीश शिव कुमार तिवारी की अदालत ने इंकार कर दिया। न्यायालय ने उसका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है। अभियुक्त को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा।
अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता देवेश श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि 25 अप्रैल 2026 को विश्व विद्यालय परिसर में रहने वाले पूर्व सहायक कुलपति मनीराम वर्मा अपनी स्कूटी से बाजार से घर लौट रहे थे। जैसे ही वह विश्विद्यालय परिसर में पहुंचे तभी पीछे से तेज रफ्तार से आ रही थार गाड़ी क्रमांक यूपी 93 सी के 4999 के चालक ने जोरदार टक्कर मार दी। जिससे मनीराम वर्मा घायल होकर जमीन ओर गिर गए ओर उनकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने जांच पड़ताल के दौरान पाया यह गाड़ी प्रेमनगर के नगरा निवासी प्रभात अग्रवाल की थी ओर उसे तत्कालीन झांसी स्वाट टीम का सिपाही रजत पुत्र श्यामवीर निवासी हाथरस चला रहा था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर रजत को जेल भेज दिया था। आज रजत की ओर से न्यायालय में जमानत याचिका प्रस्तुत की गई जिसकी सुनवाई दोनों पक्ष से होने के बाद न्यायालय ने आरोपी रजत को जमानत देने से इनकार कर उसका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। अभियुक्त को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा।
आपको बता दे कि इस घटना के बाद पुलिस टीम ने रॉयल सिटी से ऑन लाइन सट्टे का बड़ा सिंडिकेट पकड़ा था जिसमें रजत का नाम आया था। जिसके बाद शासन की संस्तुति पर सिपाही रजत को उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया था। साथ ही जानकारी मिली थी कि जिस थार गाड़ी से पूर्व सहायक कुलपति को कुचला था वह प्रेमनगर के सट्टा माफिया प्रभात अग्रवाल की गाड़ी थी। पुलिस ने रॉयल सिटी सट्टा सिंडिकेट में भी प्रभात अग्रवाल को आरोपी बनाया है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

