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विश्वविद्यालय का कार्य देश के लिए प्रेरणास्रोत – ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी विद्यार्थियों से किसानों तक ज्ञान पहुँचाने का सशक्त केंद्र बना विश्वविद्यालय : कुलपति

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झाँसी। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में भारत सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर), नई दिल्ली के अपर सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी (आईएएस) ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कर विभिन्न शैक्षणिक, अनुसंधान एवं कृषि विकास गतिविधियों का अवलोकन किया।

अपने दौरे के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की हाईटेक नर्सरी, पॉलीहाउस, फल, फूल एवं सब्जी उत्पादन इकाइयों, बागवानी एवं वानिकी प्रक्षेत्रों, औषधीय पौधों की इकाई, एकीकृत कृषि प्रणाली, मशरूम उत्पादन केंद्र, मधुमक्खी पालन इकाई, आधुनिक प्रयोगशालाओं तथा पुस्तकालय का भ्रमण किया और विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि त्रिपाठी का स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं विश्वविद्यालय उत्पाद भेंट कर स्वागत किया।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी (आईएएस) ने कहा कि रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का परिसर अत्यंत सुव्यवस्थित, आधुनिक एवं विकासोन्मुख है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार सिंह के नेतृत्व में शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध स्मार्ट कक्षाएं, सुसज्जित पुस्तकालय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था तथा कृषि नवाचारों की गतिविधियां विद्यार्थियों एवं किसानों दोनों के लिए लाभकारी हैं। विश्वविद्यालय द्वारा जल संरक्षण, कृषि प्रौद्योगिकी विस्तार तथा किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

त्रिपाठी ने कहा कि कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय के विकास, वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के विस्तार से संबंधित जो महत्वपूर्ण विषय उनके समक्ष रखे गए हैं, उन्हें भारत सरकार एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्तर पर गंभीरता से विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय को नियमित एवं सुदृढ़ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को उत्कृष्ट कार्यों के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी का यह प्रथम आगमन है। उन्होंने कहा कि त्रिपाठी को विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक एवं विकासात्मक कार्यों का व्यापक अनुभव प्राप्त है, इसका लाभ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं कृषि शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा।

कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि झाँसी स्थित मुख्य परिसर के साथ दतिया में पशु चिकित्सा एवं मत्स्यिकी महाविद्यालय तथा मुरैना में उद्यानिकी महाविद्यालय का सफल संचालन विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ किसानों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीकी परामर्श, कृषि प्रदर्शन एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन करता है। प्रतिवर्ष कृषि मेलों के माध्यम से नवीन कृषि तकनीकों का प्रसार किया जाता है।

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र पाँच विद्यार्थियों से हुई थी, जबकि वर्तमान में लगभग 1500 विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद, योग एवं व्यक्तित्व विकास गतिविधियों का भी नियमित आयोजन किया जाता है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों के विस्तार एवं विश्वविद्यालय के सतत् विकास के लिए चल रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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