
झांसी। सूदखोरी के जकड़ में आज भी कई लोग है, जो अपनी जीवन भर की कमाई गई पूंजी को ब्याज भरते भरते गवा देते है। इसके बावजूद भी सूदखोर का मूल धन नहीं चुकता। जिसके चलते कई लोगों को क्षुब्ध होकर आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने पड़ते है। ऐसा ही एक पीड़ित परिवार आज आईजी से मिला। जहां उन्होंने शिकायती पत्र देकर बताया कि सूदखोर से दस वर्षों में लिए सात लाख रुपया का सत्तर हजार रुपए दे चुका है, लेकिन उसके बाद भी सूदखोर सौरभ प्रेमनगंज निवासी अभी अपना मूल मांग रहा है। जिसके चलते सूदखोर ने पुलिस प्रशासन को गुमराह कर पीड़ित ओर उसके भाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। पीड़ित ओर उसकी मां ने दर्ज कराई गई एफआईआर में विवेचना अधिकारी द्वारा सही साक्ष्यों को शामिल नहीं करने पर शिकायत कर न्याय की मांग की है।
सोमवार को सीपरी बाजार के प्रेमगंज निवासी पवन चौबे अपनी मां श्रीमती आशा देवी के साथ पुलिस उपमहानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र झांसी को शिकायती पत्र देते हुए बताया कि उसके घर के पास रहने वाले एक व्यक्ति से काफी पुरानी मित्रता थी। करीब दस वर्षों से उसका लेनदेन चल रहा था। उसका आरोप है कि मित्र से उसने अलग अलग विभिन्न प्रकार से सात लाख रुपया लिया था। जिसका वह 11 हजार कभी बीस हजार रुपया महीना देता रहा। कई बार मित्र द्वारा दबाव डालने पर वह अपनी बहन ओर मां के जेवरात गिरवी रखकर उसे दो लाख तो कभी तीन लाख रुपया दे चुका है। पीड़ित का आरोप है कि इसके वाबजूद भी फर्जी हस्ताक्षर कूट रचित दस्तावेज तैयार कर पुलिस प्रशासन को गुमराह कर उसके व भाई के खिलाफ थाना सीपरी बाजार में मुकदमा दर्ज करा दिया। पीड़ित का आरोप है कि विवेचना अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं कर रहे है, पीड़ित ने बताया कि जब बैंक से खाते से नकद पांच लाख रुपया सूदखोर ने लिया पुलिस उस बैंक का सीसीटीवी फुटेज नहीं निकाल रही ओर न ही पुलिस झूठी दर्ज कराई गई एफआईआर में उनका मोबाइल का सीडीआर विश्लेषण कर रही। पीड़ित ने मांग करते हुए कहा निष्पक्ष जांच कर सूदखोर से छुटकारा दिलाया जाए।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

