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समरसता व राष्ट्रहित में एकजुट होना डॉ आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि : मुनीश जी आंबेडकर जयंती पर संगोष्ठी, सामाजिक समरसता व सद्भाव पर हुआ मंथन

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झांसी। देश के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माधव स्मृति भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी आयोजित कर उनके विचारों और योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने डॉ. आंबेडकर को सामाजिक समरसता का महान चिंतक बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता संघ के सह प्रांत प्रचारक मुनीश जी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर समाज के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि आंबेडकर ने Columbia University सहित विभिन्न संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की और अनेक विषयों में दक्षता हासिल की। वे नौ भाषाओं के ज्ञाता थे और समाज में समानता स्थापित करने के लिए जीवनभर संघर्षरत रहे।

मुनीश जी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने छुआछूत को समाज का सबसे बड़ा अभिशाप बताया और इसे समाप्त करने के लिए व्यापक प्रयास किए। उन्होंने समाज से जातिगत भेदभाव खत्म कर राष्ट्रहित में एकजुट होने का संदेश दिया। उनका मानना था कि यदि समाज समरसता व सद्भाव के साथ आगे बढ़ेगा, तो देश सशक्त और स्वतंत्र बना रहेगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुंज बिहारी भास्कर ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि समाज में समानता और शिक्षा का प्रसार ही विकास का आधार है और यही आंबेडकर के विचारों का मूल है।

विशिष्ट अतिथि ओमप्रकाश वाल्मीकि ने डॉ. आंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने बचपन से ही भेदभाव का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। उनके प्रयासों के कारण आज समाज के सभी वर्गों को शिक्षा और समान अधिकार प्राप्त हो सके हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के उच्च पदों पर बैठे लोग भी संविधान की शपथ लेते हैं, जो डॉ. आंबेडकर की देन है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एम. सिंह ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक और आर्थिक समानता का व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसे अपनाए बिना समग्र विकास संभव नहीं है। मंच पर महानागर संघ चालक सतीश शरण अग्रवाल भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महानगर कार्यवाह मुकुल पस्तोर ने किया।

इस अवसर पर विभाग प्रचारक मनोज जी ,धर्मेंद्र चौधरी , सह विभाग कारवा शशिकांत जी महानगर प्रचारक सक्षम जी , सचिन जी,महानगर प्रचार प्रमुख जितेंद्र जी ,संपर्क प्रमुख दिनेश पाठक,डॉ ललित जी ,डॉ. पूनम बुधरानी, डॉ. मोनिका गोस्वामी , ,वासुदेव , अकिचन ,उपेंद्र ,सुजीत अग्रवाल आदि स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण में आंबेडकर के विचारों को अपनाने पर जोर दिया गया।

समरसता व राष्ट्रहित में एकजुट होना डॉ आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि : मुनीश जी

 

आंबेडकर जयंती पर संगोष्ठी, सामाजिक समरसता व सद्भाव पर हुआ मंथन

 

झांसी। देश के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माधव स्मृति भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी आयोजित कर उनके विचारों और योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने डॉ. आंबेडकर को सामाजिक समरसता का महान चिंतक बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता संघ के सह प्रांत प्रचारक मुनीश जी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर समाज के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि आंबेडकर ने Columbia University सहित विभिन्न संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की और अनेक विषयों में दक्षता हासिल की। वे नौ भाषाओं के ज्ञाता थे और समाज में समानता स्थापित करने के लिए जीवनभर संघर्षरत रहे।

मुनीश जी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने छुआछूत को समाज का सबसे बड़ा अभिशाप बताया और इसे समाप्त करने के लिए व्यापक प्रयास किए। उन्होंने समाज से जातिगत भेदभाव खत्म कर राष्ट्रहित में एकजुट होने का संदेश दिया। उनका मानना था कि यदि समाज समरसता व सद्भाव के साथ आगे बढ़ेगा, तो देश सशक्त और स्वतंत्र बना रहेगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुंज बिहारी भास्कर ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि समाज में समानता और शिक्षा का प्रसार ही विकास का आधार है और यही आंबेडकर के विचारों का मूल है।

विशिष्ट अतिथि ओमप्रकाश वाल्मीकि ने डॉ. आंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने बचपन से ही भेदभाव का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। उनके प्रयासों के कारण आज समाज के सभी वर्गों को शिक्षा और समान अधिकार प्राप्त हो सके हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के उच्च पदों पर बैठे लोग भी संविधान की शपथ लेते हैं, जो डॉ. आंबेडकर की देन है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एम. सिंह ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक और आर्थिक समानता का व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसे अपनाए बिना समग्र विकास संभव नहीं है। मंच पर महानागर संघ चालक सतीश शरण अग्रवाल भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महानगर कार्यवाह मुकुल पस्तोर ने किया।

इस अवसर पर विभाग प्रचारक मनोज जी ,धर्मेंद्र चौधरी , सह विभाग कारवा शशिकांत जी महानगर प्रचारक सक्षम जी , सचिन जी,महानगर प्रचार प्रमुख जितेंद्र जी ,संपर्क प्रमुख दिनेश पाठक,डॉ ललित जी ,डॉ. पूनम बुधरानी, डॉ. मोनिका गोस्वामी , ,वासुदेव , अकिचन ,उपेंद्र ,सुजीत अग्रवाल आदि स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण में आंबेडकर के विचारों को अपनाने पर जोर दिया गया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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