झाँसी।
कुलपति प्रो. डॉ. अशोक कुमार सिंह ने इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु स्थापित होता है तथा विद्यार्थियों में नवाचार और अनुसंधान की भावना विकसित होती है।
यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और स्मरणीय रहा, जिससे उन्हें भविष्य में उच्च शिक्षा एवं कृषि विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई दिशा मिली।
कामतानाथ मंदिर के महंत डॉ. मदन दास जी के संयोजन में तथा डॉ. कृष्ण चन्द्र आचार्य पौराणिक और आचार्य सागर पाराशर के नेतृत्व में श्री कामतानाथ संस्कृत विद्यापीठ गुरुकुलम, चित्रकूट के विद्यार्थियों का रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में एक प्रेरणादायक शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस अवसर पर संस्कृत विद्यापीठ के कुल 59 विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक, शोध एवं उत्पादन इकाइयों का अवलोकन किया। निदेशक (शोध) डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को कृषि शोध एवं बीज उत्पादन प्रक्षेत्र, एकीकृत कृषि प्रणाली, गौवंश एवं बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, वानिकी एवं बागवानी से संबंधित गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी तथा स्वयं भ्रमण कराते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इन विषयों का महत्व समझाया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। निदेशक शोध डॉ. चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सरल एवं सहज भाषा में उत्तर देते हुए विश्वविद्यालयीन शिक्षा, कृषि विज्ञान तथा आधुनिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. एसएस कुशवाह ने जब विद्यार्थियों को संगणक एवं डिजिटल माध्यम से पुस्तकों के अध्ययन की जानकारी दी, तो यह जानकर विद्यार्थी अत्यंत उत्साहित हुए और आधुनिक अध्ययन संसाधनों के प्रति उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

