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चक्रवात दिव्या तूफान का कहर : 80 साल के बुजुर्ग ने बताए दहशत के वो 16 घंटे की भयानक दास्तां 

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झांसी। श्रीलंका में चक्रवात दिव्या तूफान के कहर में फंसे झांसी के प्रतिष्ठित व्यापारी दंपत्ति के सकुशल झांसी लौट आए। इसी तरह झांसी के 80वर्षीय बुजुर्ग भी श्रीलंका के चक्रवात दिव्या तूफान के बीच फसते फसते बचे। यह तूफान श्रीलंका में आया लेकिन इस तूफान ने दक्षिण भारत में भी दहशत मचा दी थी। इस तूफान से बचकर अपने परिवार के साथ झांसी घर सकुशल लौटने पर बुजुर्ग ने सुनाई वो दहशत की दास्तान। कहा आगे गाड़ी से भाग रहे थे पीछे पीछे तूफान बढ़ता जा रहा था। 26 किलो मीटर समुद्र के बीच से निकलकर पहुंचे हैदराबाद तब की राहत की सांस ली।

झांसी जनपद के सीपरी बाजार लहर गिर्द एस बी आई कॉलोनी निवासी 80वर्षीय पंडित जमुना प्रसाद वाजपेई अपने पुत्र मयंक वाजपेई, पुत्र वधु श्रीमती वंदना वाजपेई, समधी उन्नाव जिला निवासी शंभू दयाल मिश्रा के साथ चार पहिया गाड़ी से 27 नवंबर को रामेश्वरम धाम पहुंचे। जहां उन्होंने रात गुजारी। जमुना प्रसाद ने बताया कि इस दौरान तेज हवाए ओर बारिश से समुद्र का पुल भी तूफान के कहर की हिल हिल कर गवाही दे रहा था। जिस पर आस पास के लोगों से पूछने पर जानकारी मिली कि श्रीलंका में चक्रवात दिव्या तूफान आया है जो धीरे धीरे दक्षिण भारत की ओर आ रहा है। इस पर प्रशासन द्वारा यहां सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम कर रहा था। उन्होंने बताया कि रात गुजारने के बाद उन्होंने अगले दिन सुबह रामेश्वरम धाम के दर्शन किए। तभी समुद्र की लहरों की तेज आवाज, समुद्र से उठता पानी, ओर तेज आवाज बारिश के चलते भयानक मंजर बनता जा रहा था। सुरक्षा को लेकर सभी होटल मार्किट बंद कर दिए गए थे, सड़के खाली हो गई थी, जोर जोर से बादल की गड़गड़ाहट से सभी लोग हड़बड़ा गए। तूफान के भयानक मंजर को देख हम अपनी गाड़ी से बैठ कर सुरक्षित निकलने के लिए आगे बढ़ गए। उन्होंने बताया कि जैसे जैसे गाड़ी चलती जा रही मानो कोई भयानक मंजर उनका पीछा कर रहा हो जिससे बचने के लिए वह लोग भाग रहे है। उन्होंने बताया कि तूफान, पानी, गड़गड़ाहट सुन कर दहशत भरी रात ओर वो 16 घंटे की दास्तान कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने बताया कि इस तूफान की जानकारी उन्होंने अपने परिवार को फोन के माध्यम से देते हुए मोबाइल से वीडियो कॉलिंग भी कर दिखाया था। जिसे देख परिवार के लोग भी काफी दहशत में आ गए थे। हर आधा घंटे बाद परिवार के लोग लगातार मोबाइल पर संपर्क कर भगवान से सभी लोगों के सकुशल घर लौटने की कामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम धाम से जब वह हैदराबाद पहुंचे तब हवाएं पानी ओर बादलों की गड़गड़ाहट में कमी आई। जिसके बाद उन्होंने राहत की सांस ली। उन्होंने दहशत भरे 16 घंटे की दास्तान बयान करते हुए बताया कि यह जीवन का पहला भयानक मंजर वह कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने हर जगह पानी, झील, समुद्र हवाएं जो भयंकर मंजर देखे वो भूलने लायक नहीं।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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