झाँसी। रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के बहुउद्धेशीय हॉल में अर्न्तराष्ट्रीय मृदा दिवस पर मिट्टी की देखभाल, माप, निगरानी, प्रबंधन विषय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। इसकी अध्यक्षता कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने की। उन्होंने सभी आगन्तुक किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस देश की सभी कृषि संस्थाओं सहित अन्य संस्थान भी मना रहे हैं। उन्होंने किसानों से आवाहन किया कि मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत ही संतुलित उर्वरक की मात्रा खेत में डालें। किसान ज्यादा उत्पादन प्राप्त करने के लिए फास्फोरस एवं पोटाश की मात्रा अधिक खेतों में डाल देते हैं जिसके परिणामस्वरूप खेत की उर्वरा शक्ति क्षीण होने लगती है, इसलिए आवश्यक है कि प्रत्येक किसान मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कराने के उपरांत ही खेत में आवश्यक्तानुसार ही खाद डालें। खेत की उर्वरा शक्ति तभी बढ़ेगी जब उसमें जैविक एवं गोबर की खाद डाली जाएगी। केंचुए की खाद भी सरलता से किसान तैयार कर सकते हैं और इसका उपयोग खेतों में कर सकते हैं, इसमें खर्च भी काफी कम आता है। किसान फसल अवशेष को भूमि में मिलाकर भी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं। फसल चक्र अपनाते हुए दलहन की खेती अवश्य करनी चाहिए इसके अवशेषों से मृदा को काफी अधिक लाभ होता है। इस अवसर पर कुलपति ने ग्राम बीरपुरा के बृजेन्द्र कुमार पटेल, महेन्द्र कुमार पटेल, ग्राम बम्होरी के अम्बिका पटेल, ग्राम सिजोरा के जयप्रकाश, ग्राम पाली पहाड़ी के शरद प्रताप सिंह को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए। विश्व मृदा दिवस के अवसर पर विवि के विद्यार्थियों द्वारा प्रश्नोत्तरी एवं पोस्टर प्रतियोगिता में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की छात्रा वैष्णवी कुमारी को प्रथम बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष प्रणव झां एवं बीएससी उद्यानिकी द्वितीय वर्ष आंचल सिंह को द्वितीय, बीएससी उद्यानिकी प्रथम वर्ष तजीन फातिमा को तृतीय स्थान मिला।प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में बीएससी कृषि तृतीय वर्ष में जतिन नागर प्रथम, बीएसएसी कृषि चतुर्थ वर्ष में मनीष कुमार एवं शुभम पांण्डे द्वितीय बीएससी कृषि तृतीय वर्ष अर्जुन राजगुरू तृतीय स्थान पर रहे। पोस्ट प्रतियोगिता में बीएससी उद्यानिकी तृतीय वर्ष दीपिका भोई को प्रथम, बीएससी कृषि तृतीय वर्ष प्रदीप कुमार को द्वितीय, बीएसएसी वानिकी द्वितीय वर्ष के अम्ल श्री एवं बीएससी कृषि प्रथम वर्षकी छात्रा अनामिका सिंह को तृतीय स्थान मिला। इन सभी विद्यार्थियों को कुलपति ने प्रमाण पत्र देकर उत्साहवर्धन गया। डॉ. योगेश्वर सिंह ने सभी अतिथियों को पौधे स्मृति चिन्ह देकर स्वागत सम्मान किया। उन्होंने कहा कि विश्व मृदा दिवस 2024 का विषय मिट्टी की देखभाल, माप, निगरानी, प्रबंधन रखा गया है। जो कि मिट्टी की विशेषताओं को समझने और खाद्य सुरक्षा के लिए स्थायी मृदा प्रबंधन पर सूचित निर्णय लेने में सटीक मृदा डेटा और सूचना के महत्व को रेखांकित करता है। अधिष्ठाता कृषि डॉ. आरके सिंह ने कहा कि मृदा एक गर्भवती मां के समान है इसकी देखभाल भी ठीक उसी तरह से की जाती है जैसे गर्भवती मां की देखभाल होती है। जब गर्भवती मां की देखभाल ठीक होती है तो बच्चा स्वस्थ्य होता है। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह ने कहा कि अर्न्राष्ट्रीय मृदा दिवस का उद्धेश्य स्वस्थ मिट्टी हो उन्होंने आज के दिवस की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि एक इंच मिट्टी को तैयार होने में एक वर्ष का समय लगता है। हमारे भोजन की पैदावार बढ़ाने के लिए मिट्टी टिकाऊ रखना होगा। किसानों को विभिन्न वैज्ञानिक तकनीक समझाकर मृदा का स्वास्थ्य के उपाय सुझाए।इस अवसर पर डॉ. अनिल कुमार, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. एसएस कुशवाह, डॉ. मनीष श्रीवास्तव, डॉ. डीवी सिंह सहित विवि के वैज्ञानिक, शिक्षक, विद्यार्थी तथा बबीना ब्लाक ग्राम डिकोली, ब्लाक बड़ागांव जिला झाँसी के मवई गिर्द के लगभग 100 किसान उपस्थित रहे।संचालन वैष्णवी कुमारी एवं प्रणव झां ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. विश्वनाथ ने सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





