
झांसी। महंगाई के इस दौर में जहां दाल चावल और गेंहू के दाम आसमान छू रहे। वही शुद्ध खाना आम आदमी मेहनत मजदूरी करने वाले की जुबान से दूर होता जा रहा है। एक छोटे से छोटे रेस्टोरेंट में अगर एक व्यक्ति खाना खाना खाने जाता है तो लगभग डेढ़ सौ से दो सौ रूपया खर्च होता है। ऐसे में दिन भर मेहनत मजदूरी करने वाले आम आदमी की जुवान से होटल में मिलने वाला खाना दूर होता जा रहा है। मजदूर व्यक्ति होटल में खाना खाने से पूर्व सोचता है, कि यहां मैंने खाना खा लिया तो मेरे परिवार के लिए क्या बचेगा। लेकिन ऐसा नहीं है, ऐसे ही मजदूरों की समस्या को ध्यान में रखते हुए आवास विकास तिराहा के आगे रंगोली वेंकट के सामने राजू रायकवार सबसे सस्ता खाना देते है। राजू ने बताया कि सामने सरकारी माल का गोदाम है, ऐसे मजदूर होटल रेस्टोरेंट में भोजन नही कर सकता। उनकी इन्ही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए वह पचास रुपए में सात रोटी, सलाद, तीन सब्जियां और चावल देते है। उनका कहना है इतने में मजदूर का पेट भर जाता है, हां अगर कमी पड़ती है तो वह उसे दोबारा भी देते है। आज के महंगाई के इस दौर में साधारण दाल ही 150 रुपए प्लेट, ओर रोटी पांच से लेकर आठ रुपए तक की मिलती है। ऐसे में राजू रायकवार की मेहनत मजदूरों के लिए एक सेवा के रूप में साकार हो रही।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





