झाँसी। बाजरा माटे अनाज के अर्न्तगत आने वाली फसल है। किसान बाजरा की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ में बाजरा की उन्नत खेती करने की सलाह दी है। डॉ. रूमाना खान एवं डॉ. शैलजा चौहान ने बताया कि पहली मानसूनी वर्षा के बाद खेतों में 1 से 2 गहरी जुताई करने के बाद पाटा लगा दें। जुताई के समय खेत में 4 से 5 टन प्रति हैक्टेयर की दर से गोबर की खाद मिला दें। बाजरा की बुआई जून के अंतिम सप्ताह से लेकर मध्य जुलाई तक की जा सकती है। बुआई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेमी उचित रहती है। बाजरा की उन्नत संकर प्रजातियां एचएचबी – 67 और एमपीएमएच – 21 आदि हैं। एक हेक्टेयर में 12-14 तथा एक ऐकड़ में 5-6 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। बाजरे के लिए वर्षा आधारित फसल में 40 किग्रा नाइट्रोजन, 40 किग्रा फास्फोरस और 20 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। बुवाई के 15 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इस विधि से बुआई करने पर किसान अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





