झांसी। दलित की मारपीट कर जाति सूचक शब्दो से अपमानित करने के आरोप सिद्ध होने पर न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति/ अनु सूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम झांसी ने दो अभियुक्तों को तीन तीन वर्ष का कारावास और सात हजार पांच रुपया जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया है। थाना मऊरानीपुर में 7 अप्रैल 2002 को जितेंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था की वह घर के पास बने हैडपंप पर पानी भर रहा था। तभी वहां नहा रहे वीरेंद्र पर पानी के छींटे आ गए। जिसको लेकर वीरेंद्र ने जितेंद्र के साथ मारपीट कर गंदी गंदी गालियां और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। इसकी जानकारी होने पर जब जितेंद्र की मां वीरेंद्र के घर उलाहना देने गई तो वहां मौजूद वीरेंद्र, हरदयाल, मोहन और जुगल किशोर ने उसकी मां को जाति सूचक शब्दो से अपमानित करते हुए मारपीट कर जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। इस घटना की पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। आज इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए न्यायालय विशेष अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण झांसी न्यायाधीश शक्ति पुत्र तोमर ने जुगल किशोर और मोहन लाल की मृत्यु हो जाने पर दो आरोपी वीरेंद्र एवम हर प्रसाद को दोष सिद्ध होने पर तीन तीन वर्ष का कारावास और साढ़े सात हजार रुपए अर्थदंड अदा करने का आदेश सुनाया। इस मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता केशवेंद्र प्रताप सिंह और कपिल करोलिया ने की।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





