झांसी। आज देश में आपातकाल लागू हुए भले ही 48 वर्ष बीत गए हो लेकिन आज जब आपातकाल की बात होती है तो भुक्तभोगियों के शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल घोषित किए जाने के बाद उसका देश की छात्र शक्ति और युवाओं ने खुलकर विरोध किया। उसी कड़ी में झांसी से वर्तमान में वरिष्ठ पत्रकार जो तत्कालीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयं सेवक व गुरसरांय स्थित खैर इंटर कॉलेज के इंटरमीडिएट के छात्र रामसेवक अडजरिया ने 13 दिसंबर 1975 को झांसी के सदर बाजार में चार साथियों के साथ सत्याग्रह किया। इसके परिणाम स्वरूप उन्हें सदर बाजार थाना की पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन उनका मनोबल बहुत ऊंचा था। गिरफ्तार होने के बाद भी वह व उनके साथी नारा लगाते रहे-दम है कितना दमन में तेरे देख लिया और देखेंगे,यह दीवाने कहां चले जेल चले भाई जेल चले। देश से आपातकाल हटाओ लोकतंत्र को बहाल करो, के नारों के साथ उन्हें अदालत में पेश किया गया। वहां से उन्हें जेल भेजने का आदेश दे दिया गया। हिन्दुस्थान समाचार से वार्ता करते हुए श्री अडजरिया बताते हैं कि जब वह अपने साथियों मऊरानीपुर से विलास शावरीकर, गुरसरांय से राजेन्द्र कुशवाहा व सुरेश गुप्ता के साथ जेल पहुंचे तो वहां पर पहले से ही झांसी और ललितपुर जनपद के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ के नेता व स्वयंसेवक कारागार में मौजूद थे। उन लोगों ने इन छात्र स्वयंसेवकों का खुले मन से स्वागत किया गिरफ्तारी के समय जनता देखने को तो एकत्रित हुई लेकिन कोई किसी से कुछ कह नहीं रहा था। हालांकि उनके चेहरे से मूक सहमति जरूर प्रतीत हो रही थी कि यह जो कुछ भी हो रहा है, बेहतर है। उसके बाद रामसेवक अडजरिया व उनके साथी करीब साढे 5 माह तक जेल में ही रहे। यहां तक कि उन्हें इंटरमीडिएट की परीक्षा जेल में ही देनी पड़ी। बाहर निकलने की उन्हें कदापि अनुमति नहीं थी। न अपील,न ही कोई दलील कोई भी सुनने को तैयार नहीं था। इंदिरा गांधी का इतना आतंक था कि अधिकारी चाहते हुए भी कोई सहयोग इन लोगों का नहीं कर सके। इसके इतर छात्र स्वयंसेवकों का मनोबल इतना ऊंचा था कि उन्होंने हार नहीं मानी। क्योंकि उन्हें भरोसा था कि देश में उनकी यह मुहिम परिवर्तन लाएगी और उसका परिणाम भी देखने को मिला। 1977 में देश की तानाशाह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आपातकाल को हटाना ही पड़ा। श्री अडजरिया ने बताया कि जेल में ही इंटरमीडिएट के सभी विषयों की पढ़ाई के लिए उन्हें पहले से ही शिक्षक उपलब्ध मिले,क्योंकि उनको भी गिरफ्तार किया गया था। यहां हाई स्कूल से लेकर स्नातक तक के सभी छात्र मौजूद थे और उनका अध्ययन संपन्न कराने के लिए शिक्षकों की भी व्यवस्था सुचारू थी। यही नहीं स्वयंसेवक सुबह और शाम शाखा भी लगाते थे। ध्वज प्रणाम से लेकर वंदे मातरम का गायन और भारत माता की जयघोष उनके प्रति दिन की दिनचर्या में शामिल था। शाखा में प्रार्थना भी प्रतिदिन की जाती और सुबह शाम नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि भूमि के गायन से कारागार भी गुंजायमान हो उठता था। बताया कि झांसी और ललितपुर के करीब 90 लोग उस समय जिला कारागार में निरुद्ध रहे। जिन्हें बाद में 2006 में लोकतंत्र सेनानी घोषित किया गया।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





