जिलाधिकारी गौरांग राठी सहित प्रिंसिपल महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ने दी बधाई ऑपरेशन के बाद अब श्रीमती उल्फत की स्थिति बेहतर मरीज और परिजन इलाज से खुश और संतुष्ट

झाँसी। चिकित्सा के क्षेत्र में डॉक्टरों का समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता किसी मरीज के लिए नई उम्मीद बन सकती है। इसका एक उदाहरण झाँसी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला, जहाँ 37 वर्षीय विकलांग महिला श्रीमती उल्फत का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। जिलाधिकारी गौरांग राठी एवं प्रधानाचार्य महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज डॉ0 सुधीर कुमार ने टीम को बधाई देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। जिलाधिकारी ने कहा की महारानी लक्ष्मी मेडिकल कॉलेज झाँसी की यह पहल उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जो शारीरिक अक्षमता या अन्य जटिलताओं के कारण इलाज से वंचित रह जाती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती उल्फत के पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) में लगभग 15 एमएम की पथरी फँसी हुई थी, जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। इलाज के लिए वह महोबा सहित कई अन्य अस्पतालों में गईं, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने में असमर्थता जताई। दरअसल, महिला बचपन से ही विकलांगता से प्रभावित हैं, जिसके कारण उनके दोनों पैर मुड़े हुए हैं। इस वजह से ऑपरेशन के दौरान मरीज को उचित स्थिति में रखना और सर्जरी करना काफी चुनौतीपूर्ण था। लगातार निराशा मिलने के बाद महिला झाँसी मेडिकल कॉलेज पहुँचीं, जहाँ उनकी मुलाकात सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ0 नीरज कुमार बनोरिया से हुई। डॉ0 बनोरिया ने मरीज की स्थिति को समझते हुए उनका इलाज करने का निर्णय लिया और सभी आवश्यक जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन की योजना बनाई। ऑपरेशन के दौरान मरीज के मुड़े हुए पैरों के कारण उन्हें उचित पोजीशन में रखना एक बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम ने पूरी सावधानी, मेहनत और कुशलता के साथ ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस पूरे इलाज के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ0 नीरज कुमार बनोरिया (एमएस) एवं उनकी टीम (डॉ0 राहुल लिटोरिया (MS), डॉ0 तरुण आर्या (MS), डॉ0 विवेक, डॉ0 कंवल दीप कौर, डॉ0 निमिष देवरा, डॉ0 राजवी बाजपेयी, डॉ0 जयंत परमार, डॉ0 अमित स्वामी) ने न केवल चिकित्सकीय जिम्मेदारी निभाई, बल्कि मरीज की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हर संभव आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इस दौरान विभागाध्यक्ष डॉ0 नीरज कुमार बनोरिया और उनकी टीम के निरंतर प्रयास और संवेदनशील व्यवहार ने मरीज और उनके परिजनों को काफी संबल मिला। सफल ऑपरेशन के बाद अब श्रीमती उल्फत की स्थिति बेहतर है। मरीज और उनके परिजन इलाज से बेहद खुश और संतुष्ट हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अच्छी चिकित्सा केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में मरीज के साथ खड़े रहना भी है। झाँसी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की यह पहल उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है, जो शारीरिक अक्षमता या अन्य जटिलताओं के कारण इलाज से वंचित रह जाते हैं।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *