झांसी। कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने और हर फरियादी को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही आईजीआरएस सुविधा में हमेशा प्रदेश में अब्बल बनने के लिए आने वाले शिकायती पत्रों का गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण करने के निर्देश सरकार के ही है। आइजीआरएस की शिकायतों का समय से गुणवत्ता पूर्वक निस्तारण करने से विभाग की छवि अच्छी बनती है, ओर उन्ही विभाग के अफसरों की सरकार सराहना करती है। लेकिन इन शिकायती पत्रों का किस तरीके से गुणवत्ता पूर्वक निस्तारण होता है, यह पीड़ित फरियादी ही बता सकता है। ऐसा ही एक मामला जनपद झांसी के थाना सदर बाजार से जुड़ा है। जहां फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के खिलाफ सारे साक्ष्य ऑडियो वीडियो सहित कई बार पुलिस अधिकारियों और आईजीआरएस पर पीड़ित ने किए ओर उसने आरोप भी लगाए की पुलिस इस गिरोह को बचाने का प्रयास कर रही। लेकिन पीड़ित फरियादी गौरव यादव दो माह तक न्याय पाने को हर चोखट पर भटकता रहा लेकिन उसे न्याय नहीं मिला। हर बार अधिकारियों के यहां दिए शिकायती पत्र आईजीआरएस पर चढ़ कर सदर थाने पहुंचे लेकिन कार्यवाही नही हुई अंत में शिकायत कर्ता की मौत हो गई। अब सदर पुलिस को आईजीआरएस शिकायती पत्र को समय से निस्तारण करने में कोई आख्या बिना पूछे या बिना दिमाग लगाए नही लगानी पड़ेगी।मामला खंडेराव गेट निवासी गौरव यादव ने सात सितम्बर को सदर थाना और मुख्य मंत्री पोर्टल सहित कई दिनों तक लगातार वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायती पत्र देते हुए बताया था की सदर बाजार में स्थित एक कोचिंग सेंटर संचालिका जिस पर राजनेतिक संरक्षण प्राप्त है, उसने फर्जी मार्क शीट बनाकर उसे दी और रेलवे ने भी उस मार्क शीट को फर्जी बताया है। इसके बाजवजूद भी सदर बाजार पुलिस लगातार आने वाले गौरव यादव के शिकायती पत्र को गुणवत्ता पूर्वक बिना कार्यवाही किए निस्तारण की रिपोर्ट लगाकर उसे डिफाल्टर होने से बचाती रही साथ ही फर्जी मार्क शीट गिरोह पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। जब भी गौरव यादव का शिकायती पत्र सदर थाने पहुंचता था पुलिस को काफी दिमागी मशक्कत करनी पड़ती थी उस पर रिपोर्ट लगाने में। आखिरी बार उसकी शिकायत को गंभीरता से लेकर डीआईजी ने कार्यवाही के निर्देश दिए तो सदर पुलिस ने केंद्र सरकार की बड़ी शाखा रेलवे के आदेश को दर किनार करते हुए एक चिट्ठी शिक्षा विभाग भेज दी फिर भी गौरव यादव को न्याय नहीं दिला पाई। लागतार दो महीनो से न्याय की भीख मांग रहा गौरव यादव अब कोई आईजीआरएस नही करेगा, जिससे दिमागी कसरत नही लगानी पड़ेगी और आरोपी चैन से रह कर नए नए लोगों को फिर अपने जाल में फसाएंगे क्योंकि गौरव यादव ने दो दिन पूर्व अपना दम तोड दिया है। यह एक बड़ी विडंबना है, की अधिकारी निर्देश देते है, गुणवत्ता पूर्वक निस्तारण नहीं होने पर कार्यवाही होगी इसकी हम लगातार मॉनिटरिंग कर रहे है। लेकिन पांच से दस बार गए गौरव यादव के शिकायती पत्र की मॉनिटरिंग किसी ने नहीं की। योगी सरकार की हर पीड़ित को न्याय दिलाने वाली मंशा पर पानी सा फैरा जा रहा है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





