सीडीओ की अभिनव पहल, मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र में खेल- खेल में बच्चों का होगा बौद्धिक विकास मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र स्वयं बने शिक्षक और हर दीवार बनी एक पाठशाला

झांसी। भारत का भविष्य जिन नन्हें कदमों पर आगे बढ़ता है, वे आज जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और मुस्कान के साथ नई दिशा पा रहे हैं। कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र आज प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक चेतना और ग्रामीण रोजगार के बहुआयामी केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। जनपद में लेवा एंव कोट (बेहटा) सहित अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों में यह परिवर्तन दिखाई भी दे रहा है। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड की अभिनव पहल पर जनपद की समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मुहिम शुरू की गई है, जिसका एकमात्र उद्देश्य खेल-खेल में बच्चों का बौद्धिक विकास और शारीरिक विकास कराए जाने के साथ प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाना है। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जनपद के 08 विकास खण्डों के 10-10 आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र बनाने में जुटा है। जिले के अन्य आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों की सुविधाओं के हिसाब से ईसीसीई मॉडल के अनुरूप मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये सभी केन्द्र अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस व चाइल्ड फ्रेंडली होंगे। इनमें बच्चों के लिए स्कूल पूर्व शिक्षा के साथ मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध होंगे। दीवारों को बच्चों से जुड़ी विभिन्न कलाकृतियों के माध्यम से बच्चे आसानी से पढ़ाई कर सकें, इसकी भी व्यवस्था की गई है। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने विकासखण्ड बड़ागांव एवं बबीना के मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र कोट (बेहटा) एवं लेवा की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र में स्मार्ट टीवी के माध्यम से नौनिहालों को जहां रोचक जानकारियां दी जा रही हैं,वहीं लघु फिल्म के माध्यम से उन्हें जागरुक किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें सौरमंडल के विषय में भी चित्रों के माध्यम से बताया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र के रूप में विकसित करने को लेकर मुख्य विकास अधिकारी बताते हैं कि पहले जिले में 80 मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण को पूरा किया गया। विभिन्न विभागों के अभिशरण से निर्मित मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों ने Building as Learning Aid (BALA) कि अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार कर दिया है। प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन में दीवारों, सीढ़ियों, दरवाजों और खुली जगह को शिक्षण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। हिन्दी अंग्रेजी वर्णमाला, अंक आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव जंतु, स्थानीय परिवेश और सामान्य ज्ञान से जुड़ी चित्रकारी बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर प्रदान कर रही हैं। अब आंगनवाड़ी भवन स्वयं एक शिक्षक बन चुके हैं, जहां हर दीवार एक पाठशाला है। आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सुविधा के अनुसार बाल मैत्री शौचालय में दरवाजा के अलावा केंद्र के भवन को भी लर्निग टूल के रूप में विकसित किया गया है ताकि जो भी बच्चे केंद्र में पहुंचे वहां वह खेल-खेल के माध्यम से पढ़ना सीख सकें। ईसीसीई मॉडल के अनुरूप बनने वाले मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र में लिखने- पढ़ने के लिए आकर्षक रंगीन टेबल और कुर्सी, बच्चों के लिए किताबों का कोना, झूला, पेंटिंग व ज्यामितीय आकृतियां, पानी पीने के लिए आरओ व हाथ धोने को पानी की व्यवस्था, पोषण वाटिका,बगीचा, केन्द्र के बरामदे व बाहरी दीवारों पर पेंटिंग आदि की सुविधा उपलब्ध है। आंगनवाड़ी केंद्रों का यह रूपांतरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्र वास्तव में बच्चों की पहली पाठशाला बन गए हैं, जहां शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार एक साथ मिलकर सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की मजबूत नींव रख रहे हैं।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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