झांसी। ईडी ने बुधवार की तड़के भारी केंद्रीय सुरक्षा बल के साथ समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के निवास मून सिटी और उनके करीबियों के घरों पर ग्यारह ठिकानों पर छापेमारी थी। करीब 18 घंटे तक चली इस छापेमार कार्यवाही में ईडी ने आय से जुड़े उनके कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कम्पनियों का लेखाजोखा जब्त कर लिया था। ईडी ने पूर्व विधायक ओर उनके सहयोगियों के यहां छापेमार कार्यवाही के दौरान कई आपत्ति जनक रिकॉर्ड, दस्तावेज, जिसमें अंतर कंपनी में लेनदेन तृतीय पक्ष समझौते संदिग्ध लेनदेन दर्शाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड और विभिन्न व्यवसायिक संस्थाओं परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज विलासिता पूर्ण संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए थे। इस दौरान ईडी को कुछ कंपनियां ऐसी मिली जो सिर्फ कागजों में दर्ज थी और कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं कर रही थी। संदिग्ध बेनामी अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज ओर अपराध की आय को छिपाने से संबंधित दस्तावेज भी बरामद कर जब्त किए। छापेमार कार्यवाही पूर्ण करने के बाद ईडी रवाना हो गई। गुरुवार की देर शाम ईडी ने अपने जारी किए प्रेस नोट के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि
प्रवर्तन निदेशालय कार्यालय ईडी इलाहाबाद उप क्षेत्रीय कार्यालय ने आठ जुलाई को झांसी, लखनऊ, और उत्तर प्रदेश के अन्य स्थानों प्रावधानों के तहत पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इलाहाबाद उप क्षेत्रीय जुलाई, 2026 को झांसी, लखनऊ और उत्तर प्रदेश में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के दीप नारायण सिंह यादव, गरौथा निर्वाचन क्षेत्र, झांसी के विधायक और अन्य के खिलाफ चल रही धन शोधन की जांच के संबंध में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।
ईडी ने उत्तर प्रदेश 23.02 सरकार के सतर्कता विभाग द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दीप नारायण सिंह यादव ने जांच अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों के अतिरिक्त लगभग करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की थी। यह भी पता चला है कि दीप नारायण सिंह यादव के खिलाफ झांसी और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के विभिन्न पुलिस थानों में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में आईपीसी, 1860 के तहत डकैती, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, गैर इरादतन का प्रयास, विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इनमें से कई अपराध पीएमएलए, 2002 के तहत अनुसूचित अपराध हैं। हत्या
एफआईआर/चार्जशीट से पता चला है कि दीप नारायण सिंह यादव ने कथित तौर पर उपर्युक्त आपराधिक गतिविधियों और अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करके अपराध से प्राप्त धन का पर्याप्त हिस्सा अर्जित किया। यह भी पता चला है कि उसने कथित तौर पर कंपनियों का एक नेटवर्क बनाया, जिसमें फर्जी संस्थाएं भी शामिल थीं, ताकि अपराध से प्राप्त धन को विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं और निवेशों के माध्यम से वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया जा सके, जिन पर उसका, उसके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों का नियंत्रण था। यह भी बताया गया है कि अपराध से प्राप्त धन को ऐसी संपत्तियों में लगाकर और उन्हें बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित करके कई चल और अचल संपत्तियां कथित तौर पर सहयोगियों और दूर के परिवार के सदस्यों के नाम पर अधिग्रहित की गई।
बरामद तलाशी अभियान के दौरान, ईडी ने कई आपत्तिजनक रिकॉर्ड और दस्तावेज़ किए, जिनमें अंतर-कंपनी लेनदेन, तृतीय-पक्ष समझौते, संदिग्ध लेनदेन परिवार दर्शाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड और विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं, के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज विलासितापूर्ण संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज़ शामिल हैं। कुछ कंपनियां ऐसी भी पाई गईं जो केवल कागजों पर ही मौजूद थीं और कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं कर रही थीं। संदिग्ध बेनामी और अपराध की आय को छिपाने से संबंधित रिकॉर्ड भी बरामद कर जब्त किए गए। वही इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव ने मीडिया को जारी किए अपने बयान में बताया कि उन्हें ईडी पर पूर्ण विश्वास है, उनकी जांच निष्पक्ष होगी। उन्होंने कहा कई एजेंसियां उनकी जांच कर चुकी है, ईडी ने जांच के दौरान उनसे जो दस्तावेज मांगे उन्होंने सौंप दिए, उन्होंने इशारों में कहा कि उन्हें केवल परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई भी आय से अधिक संपत्ति अपराध से नहीं जोड़ी। उनके खिलाफ जो मुक़दमे दर्शाए गए उनमें कही उनका नाम नहीं था। उनका नाम जोड़ा गया उन्हें केवल परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व विश्वास है कि ईडी निष्पक्ष जांच करेगी। आपको बता दे कि ईडी ने बुधवार को तड़के पूर्व विधायक दीप नारायण सहित उन्हें भाई बबलू अन्ना, उनके करीबी अशोक गोस्वामी सहित ग्यारह ठिकानों पर रेड डाली थी।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

