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आपदा प्रबंधन कार्यों में HAM Radio के प्रभावी उपयोग हेतु मण्डलीय कार्यशाला सम्पन्न

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झांसी। आज आपदा प्रबंधन कार्यों में HAM Radio के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने हेतु मण्डलायुक्त विमल कुमार दुबे की अध्यक्षता में नवीन सभागार, कलेक्ट्रेट झांसी में मण्डलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आपदा की स्थिति में वैकल्पिक संचार व्यवस्था के रूप में हैम रेडियो की उपयोगिता एवं संचालन संबंधी जानकारी प्रदान की गई।

कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) झांसी श्रीमती पल्लवी मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) जालौन राजीव राज, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे ललितपुर संजय मिश्रा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) राजकिशोर राय सहित समस्त उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नोडल अधिकारी बाढ़ झांसी तथा झांसी, जालौन एवं ललितपुर के विभिन्न अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

प्रशिक्षण सत्र में धीरज पाठक (आपदा विशेषज्ञ, झांसी), शैलेन्द्र कुमार (रेडियो निरीक्षक, पुलिस लाइन झांसी) एवं फरादे विठल (नायब सूबेदार, 114 इंजीनियरिंग रेजीमेंट, झांसी) द्वारा हैम रेडियो के तकनीकी एवं व्यवहारिक उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यशाला में बताया गया कि हैम रेडियो (Ham Radio), जिसे एमेच्योर रेडियो (Amateur Radio) भी कहा जाता है, एक गैर-व्यावसायिक दो-तरफा रेडियो संचार सेवा है। इसके माध्यम से बिना इंटरनेट अथवा मोबाइल नेटवर्क के रेडियो तरंगों द्वारा देश-विदेश तथा अंतरिक्ष तक संपर्क स्थापित किया जा सकता है। यह एक लाइसेंस प्राप्त सेवा है, जिसका उपयोग तकनीकी अनुसंधान, शैक्षिक गतिविधियों, व्यक्तिगत शौक तथा विशेष रूप से प्राकृतिक आपदाओं के समय आपातकालीन संचार के लिए किया जाता है।

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि हैम रेडियो में ट्रांसीवर (ट्रांसमीटर एवं रिसीवर) तथा एंटीना का उपयोग किया जाता है। उपयोगकर्ता सरकार द्वारा निर्धारित विशिष्ट रेडियो आवृत्तियों (Frequency Bands) पर संचार करते हैं। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक संपर्क स्थापित किया जा सकता है, यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) एवं उपग्रहों से भी संवाद संभव है।

कार्यशाला में हैम रेडियो के प्रमुख उपयोगों पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि भूकंप, बाढ़ अथवा तूफान जैसी आपदाओं के दौरान जब मोबाइल नेटवर्क एवं इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाती हैं, तब हैम रेडियो राहत एवं बचाव कार्यों में संचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनता है। इसके अतिरिक्त यह तकनीकी ज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रेडियो संचार संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने के साथ वैश्विक नेटवर्किंग का भी माध्यम है।

भारत में वर्ष 2001 के भुज भूकंप, वर्ष 2004 की हिंद महासागर सुनामी तथा वर्ष 2013 की उत्तराखंड आपदा सहित विभिन्न आपदाओं के दौरान हैम रेडियो का प्रभावी उपयोग किया गया। साथ ही, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से देश के विद्यार्थियों के साथ हैम रेडियो के माध्यम से संवाद स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया गया।

हैम रेडियो संचालन के लिए भारत सरकार से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके लिए संचार मंत्रालय के अधीन बेतार आयोजना एवं समन्वय स्कंध (WPC Wing) द्वारा परीक्षा आयोजित की जाती है। न्यूनतम 12 वर्ष आयु का कोई भी भारतीय नागरिक परीक्षा उत्तीर्ण कर लाइसेंस प्राप्त कर सकता है तथा इसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं है। परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत ऑपरेटर को सरकार द्वारा विशिष्ट कॉल साइन (Call Sign) प्रदान किया जाता है।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि मोबाइल एवं इंटरनेट के आधुनिक युग में भी हैम रेडियो की प्रासंगिकता बनी हुई है, क्योंकि यह सेल टावर, इंटरनेट सर्वर अथवा विद्युत ग्रिड जैसी आधारभूत संरचनाओं पर निर्भर नहीं होता, जिससे आपदा की स्थिति में यह अत्यंत विश्वसनीय संचार माध्यम सिद्ध होता है।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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