झांसी। आग लगाकर आत्महत्या करने वाली सिमरधा गांव की दलित महिला की मौत के मामले बनाए गए अभियुक्तों को न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम झांसी आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए दोनों का जमानत प्रार्थना पत्र सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है।
अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक केशवेंद्र प्रताप सिंह/ कपिल करोलिया ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना सीपरी बाजार के ग्राम सिमरधा में रहने वाली महिला राजकुमारी ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत ऋण लिया था, जिस पर वह खाली पड़ी जमीन पर मकान बना रही थी। अभियुक्तगण उसे मकान नहीं बनाने दे रहे थे। अभियुक्त उस जमीन को अपनी बता रहे थे। जिसके चलते मकान बनाने के दौरान माह मार्च में विपक्षियों से विवाद हो गया। विवाद के दौरान श्रीमती राजकुमारी अहिरवार ने अपने शरीर पर डीजल डालकर आग लगा ली जिससे वह गंभीर अवस्था में झुलस गई थी उसे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज फिर लखनऊ में एडमिट कराया था। जहां उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आज आरोपी वनमाली ओर उसकी पत्नी श्रीमती भगवती की ओर से आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने आज दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए उनका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

