झांसी। थाना सीपरी बाजार क्षेत्र से पांच माह पूर्व अपहृत हुई नाबालिग की आज तक बरामदगी नहीं होने ओर विवेचना में लापरवाही बरतने पर हाइकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए पुलिस को जमकर फटकार लगाते हुए विवेचना पर सवाल खड़े कर एसएसपी से पूरे मामले शपथ पत्र मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर कोर्ट नंबर छ की अदालत ने दिया है।
पीड़िता की ओर से याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के लहर गिर्द निवासी प्रभा रायकवार ने याचिका में बताया कि 10 जून 2025 को उसकी नाबालिग पुत्री को पड़ोस का नाबालिग भगा कर ले गया था। वह थाने पहुंची पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। अगले दिन वह स्वयं उस रास्ते पर घूमते हुए सीसीटीवी फुटेज ढूंढ कर पुलिस के पास ले गई जिसमें आरोपी उसकी पुत्री को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई पड़ रहा है। इसके बाद पुलिस ने उस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को बाल सुधार कारागार भेज दिया। जिसके बाद उनकी जमानत हो गई ओर आरोपी घर आ गया। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने जेल से फोन कर उसे व परिजनों को बताया था कि उसकी पुत्री मेरे पास रिश्तेदार के यहां ग्वालियर में है, ओर तुम मुकदमा वापस नहीं लोगे तो उसकी हत्या कर देंगे। इसकी लिखित शिकायत ओर मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग सहित उसने पुलिस अधिकारियों को सौंपे थे। जिसकी जांच भी उसी दरोगा से कराई गई जो पीड़िता की पुत्री के अपहरण की विवेचना कर रहा है। पीड़िता का आरोप है कि विवेचक ने मुकदमे में पोस्को एक्ट नहीं लगाया ओर न ही उसकी पुत्री की बरामदगी की। विवेचक का कहना है कि आरोपी को उन्होंने मध्यप्रदेश के बीना स्टेशन से पकड़ा है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पुत्री स्टेशन से देर रात भाग गई। पीड़िता का आरोप है कि अगर उसकी बेटी स्टेशन से कहा गई आसमान में तो नहीं उड़ गई होगी। अगर स्टेशन से बाहर निकली होगी तो सीसीटीवी फुटेज में कही तो आएगी। लेकिन विवेचक ने न तो मुकदमे में पोस्को एक्ट की धारा बढ़ाई न ही बीना स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज एकत्रित किए ओर न ही आरोपी द्वारा जेल से किया गया फोन की रिकॉर्डिंग कब्जे में लेकर जांच पड़ताल की ओर न ही आरोपी द्वारा बताए गए घटना में उसके अन्य साथियों के नाम प्रकाश में आने के बाद उनसे पूछताछ की। हाइकोर्ट ने याचिका दायर करने वाली महिला की ओर अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह की दलील सुनने के बाद पुलिस को जमकर फटकार लगाते हुए विवेचक द्वारा की गई विवेचना पर सवाल खड़ा कर काफी नाराजगी जाहिर की। हाइकोर्ट ने कहा कि चार माह बीत जाने के बाद भी नाबालिग को बरामद नहीं करना यह पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह है। हाइकोर्ट ने पुलिस का यह पक्षपात रवैया मानते हुए फटकार लगाकर एसएसपी से पूरे मामले में दस दिसंबर को हलफनामा दाखिल करने का आदेश सुनाया है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

