
झांसी। भले ही सरकारें जाति भेद भाव खत्म करने का दावा कर रही हो। लेकिन आज भी कुछ ऐसे लोग जाति को लेकर भेद भाव कर रहे जो खुद को समाज का बड़ा ठेकेदार समझते है। हद तो तब है, जाती भेद भाव शिक्षा के मंदिर में हो और उससे त्रस्त होकर पीड़िता आत्महत्या पर उतारू हो जाए। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है, जहां प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत रोजगार प्रशिक्षण लेने के लिए भेल स्थित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण केंद्र आरा मशीन पर होस्टल में एडमिशन हो गया। पीड़िता सकराल निवासी महिमा अहिरवार का आरोप है कि प्रशिक्षण केंद्र में तैनात प्रशिक्षण देने वाली महिला टीचर तथा अन्य छात्राएं उससे इसलिए बुराई मानती है क्योंकि वह अनुसूचित जाति की है। उसका आरोप है कि उससे होस्टल में लगातार भेदभाव किया जाता था और उसे वहां से भाग जाने को कहते थे। होस्टल छोड़कर न जाने पर उसे गायब करने और मारपीट की धमकी देते थे। इस लोगों से धमकियों और उत्पीड़न से त्रस्त होकर छात्रा ने गत दिवस होस्टल की छत से कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया जिसमें उसे गम्भीर चोट आई है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा





