झांसी। दीपावली हिन्दूओं का मुख्य त्योहार होने के कारण इस त्यौहार को सभी बड़े धूम धाम से मनाते हैं | लेकिन कभी कभी इस त्यौहार की ख़ुशी की दौरान छोटी सी अनदेखी या असावधानी से घर में मातम सा छा जाता है या फिर किसी की जिंदगी में हमेशा के लिए अँधेरा भी छा सकता है ।इसका कारण कहीं किसी पटाखे की फैक्टरी में आग लग जाना तो कभी पटाखे से किसी की आँख जख्मी या फिर किसी बच्चे का जल जाना होता है । इस पर्व पर दीप जलाने का मतलब अन्धकार अतः अज्ञान और नकारात्मकता को दूर करना और प्रकाश अतः ज्ञान और सकारात्मकता का स्वागत करना है । न कि कोई जल जाये या किसी की रोशनी चली जाये। ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ प्रभात चौरसिया ने बच्चों को पटाखों से दूर रखने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों में इस त्यौहार को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्साह होता है, इसलिए पटाखे या फुलझड़ी छुड़ाते वक़्त माँ- बाप या कोई समझदार व्यक्ति बच्चों के साथ रहें ।पटाखों की क्वालिटी देख कर ही उनका इस्तेमाल करें । संभव हो तो चश्मा पहन कर पटाखे छुड़ाएं । उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखे अतः इकोफ्रेंडली पटाखे ही इस्तेमाल किए जाएं|स्वांस के रोगियों को घर के भीतर ही रहना बेहतर है, क्योंकि बाहर वातावरण में प्रदूषण की वजह से उन्हें अस्थमा का अटैक पड़ सकता है ,और अगर कोई पटाखे से जल जाये तो तुरंत 15 से 20 मिनट तक ठन्डे पानी से उस जगह को अथवा आँख में अगर चोट पहुंचे तो आँख को भी ठन्डे पानी से साफ़ करें | आँख को दबायें नहीं और तुरंत ही नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करें। अगर कोई नेत्र सर्जन नहीं मिलता है तो chloromphenicol eye ointment लगा लें और कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोस ऑय ड्राप बार बार आँखों में डालें साथ ही त्वचा पर सिल्वरेक्स क्रीम लगावें।डॉ प्रभात चौरसिया ने कार्बाइड गन का इस्तेमाल कदापि न करने और इसका बहिष्कार करने की अपील करते हुए कहा कि गत वर्ष इस तरह के पटाखे से कई लोगों ने अपनी आँख की रोशनी गवां दी।आपातकाल की अवस्था में निकटतम चिकित्सालय में अपना इलाज करवाएं । यह सुनिश्चित रहे कि दीपावली के पर्व पर केवल खुशियां ही घर आयें।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा
