झाँसी l उत्तर प्रदेश शासन ने विधान परिषद सदस्य डॉ. बाबूलाल तिवारी के विशेषाधिकार हनन के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जिला पंचायत झाँसी के अपर मुख्य अधिकारी अली वारिस को ‘परिनिंदा दण्ड’ (Censure) प्रदान किया है। यह कार्रवाई विधान परिषद की ‘विशेषधिकार समिति’ की संस्तुति और शासन स्तर पर सम्यक परीक्षण के बाद की गई है।मामला शिक्षक विधायक डॉ. बाबूलाल तिवारी द्वारा सहायक अध्यापक, श्री छक्कीलाल गेड़ा जिला परिषद मा० विद्यालय, टोंड़ीफतेहपुर, जनपद झाँसी शशिकांत बाजपेई के प्रकरण को लेकर उठाए गए विशेषाधिकार हनन से जुड़ा है।आरोप था कि अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, झाँसी द्वारा दूरभाष पर बातचीत के दौरान सहायक अध्यापक शशिकांत बाजपेयी के विरुद्ध स्पष्टीकरण पत्र जारी किया गया, जिसमें विधान परिषद सदस्य के माध्यम से अनावश्यक दबाव बनाने का जिक्र किया गया था। इस व्यवहार से विधान परिषद सदस्य ने स्वयं को असहज और अपमानित महसूस किया तथा इसे अपने विशेषाधिकारों का हनन बताया। शासन द्वारा दिसंबर 2025 में अपर मुख्य अधिकारी, झाँसी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसे 18 दिसंबर 2025 को उपलब्ध कराया गया। मण्डलीय सदस्य/विशेषधिकार समिति विधान परिषद की 12 अगस्त 2026 की बैठक में प्राप्त निर्देशों के क्रम में अपर मुख्य अधिकारी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का परीक्षण किया गया।शासन द्वारा परीक्षण के उपरांत स्पष्टीकरण को संतोषजनक न पाते हुए, ‘उप्र० जिला पंचायत सेवा नियमावली, 1970’ के संगत नियमों के तहत अली वारिस, अपर मुख्य अधिकारी को भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति से बचने और जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने के निर्देश के साथ ‘परिनिंदा दण्ड’ से दण्डित किया गया है। यह एक तरह से प्रतिकूल प्रवीष्टि है l
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा
