
झाँसी। मोहर्रम की चौथी तारीख को कर्बला के नन्हे शहीदों, जनाबे औन अलैहिस्सलाम और जनाबे मोहम्मद अलैहिस्सलाम की याद में हुसैनी इमामबाड़े में एक मजलिस का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत कर शौहदा-ऐ-करबला को ख़िराज-ए-अक़ीदत (श्रद्धांजलि) पेश की।
मजलिस को अकबरपुर से तशरीफ लाए आली जनाब मौलाना हुसैन रिज़वी ने ख़िताब किया। उन्होंने अपने पुरअसर बयान में जनाबे औन व मोहम्मद (अ.स.) की अज़ीम कुर्बानी और उनके बेमिसाल जज़्बे पर रौशनी डाली। मौलाना ने बताया कि किस तरह इमाम हुसैन (अ.स.) के इन भानजों ने कम उम्र होने के बावजूद कर्बला के मैदान में हक़ और इंसाफ के लिए अपनी जान का नज़राना पेश किया। मौलाना के मसायब (शहादत का ज़िक्र) पढ़ते ही पूरा इमामबाड़ा ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठा और अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। मजलिस के इख्तेताम (समापन) पर जनाबे औन और जनाबे मोहम्मद अलैहिस्सलाम के ताबूत की ज़ियारत कराई गई। ताबूत देखते ही इमामबाड़े में कोहराम मच गया। अकीदतमंदों ने कतारबद्ध होकर अकीदत के साथ ज़ियारत की और मन्नतें मांगीं। मजलिस के सफल आयोजन में हुसैनी इमामबाड़े की पूरी कमेटी और स्थानीय अकीदतमंदों का विशेष सहयोग रहा। अन्त में सैयद आसिफ हैदर ने सभी का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

