
झांसी। विकसित भारत संकल्प सम्मेलन को झांसी के दीनदयाल सभागार में संबोधित करने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन में सर्व प्रथम झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई, वीरांगना झलकारी बाई, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद्र, राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त, आदि को नमन किया। इसके बाद उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमें इन परंपराओं से काटा गया और उसके कारण धीरे-धीरे करके हम अपनी विरासत से भी, हम कटते गए, छंटते गए।
यही कारण था,1947 में देश आजाद होने के बाद जब भारत माता के सपूत लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के मंदिर के पुनरुद्धार के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विरोध किया।
जब पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सोमनाथ मंदिर जा रहे थे, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री ने पत्र लिखकर के आपत्ति व्यक्त की, क्योंकि गुलामी की मानसिकता हावी हो चुकी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार हुआ जब भारत के कोई प्रधानमंत्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास में भी, प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी और भारत की केसरिया ध्वजा का, धर्म ध्वजा का आरोहण जब राम मंदिर में होना था तब अयोध्या में स्वयं पधारे, अपने कर कमलों से तीनों कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया। ये है विरासत का सम्मान।
आयोजित विकसित भारत संकल्प सम्मेलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांता क्यों सफल हो रहे थे? ऐसा नहीं कि उनके पास फोर्स ज्यादा रही हो। उनके पास फोर्स ज्यादा नहीं थी, ताकत भी ज्यादा नहीं था। हमसे बलशाली नहीं थे, वैभवशाली भी नहीं थे, शक्तिशाली नहीं थे।
हमारे पास सब कुछ था। बल भी था, बुद्धि भी थी, वैभव भी था। हमारे पिछड़ने का कारण क्या था? एक कारण था कि हम विभाजित थे। जाति के नाम पर, क्षेत्र के नाम पर, भाषा के नाम पर, अलग-अलग वादों के आधार पर हम विभाजित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी निष्ठा देश के लिए नहीं, सनातन धर्म के लिए नहीं, हमारी निष्ठा अपने लिए स्वयं के लिए थी, अपनी जाति विशेष के लिए थी। परिणाम क्या था?
विदेशी आक्रांता पहले हमें तोड़ते थे, फिर हमें काटते थे, फिर हम पर राज करके हमें ही गुलाम बना देते थे। यही तो हुआ। इतिहास उठा करके देखिए। यही होता रहा, इसलिए एकता पर बल देना। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इस समाज को जाति के नाम पर बांट रहे हैं ना, इस समाज के हितैषी नहीं और अगर देखना हो जब इनका शासन था तब ये क्या करते थे? अपने परिवार का पेट भरते थे। तब परिवार के लिए कार्य करते थे, और जब सत्ता से बेदखल कर दिया जनता ने, तो अब जाति के नाम पर समाज को बांटने चले।
मां पीतांबरा पीठ पहुंच कर की पूजा अर्चना
झांसी। अपने झांसी के दो दिवसीय दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने मां पीतांबरा देवी के दर्शन कर पूजा अर्चना की। इसके बाद वह ललितपुर पहुंचे। जहां जन सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने करोड़ों की परियोजनाएं ललितपुर को दी। इसके बाद योगी आदित्यनाथ दोपहर को झांसी पहुंचे। दीनदयाल सभागार में सम्मेलन को संबोधित करने के बाद देर शाम वह मंडलायुक्त सभागार में विकास ओर कानून पर समीक्षा की। रात्रि सर्किट हाउस में विश्राम के बाद वह रविवार की सुबह योग शिविर में भाग लेंगे साथ ही करोड़ों की परियोजनाओं की झांसी को सौगात देंगे।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

