
झाँसी। मेवातीपुरा स्थित हुसैनी इमामबारगाह, मरहूम सैयद सादिक़ अली आब्दी साहब में आज, 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को ‘जन्नतुल बक़ी’ के इन्हिदाम (विध्वंस) की याद में एक विशेष ‘मजलिस-ए-अज़ा’ का आयोजन किया गया। यह मजलिस मग़रिबैन की नमाज़ के तुरंत बाद शुरू हुई। यह मजलिस सऊदी अरब के मदीना मुनव्वरा स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तान ‘जन्नत-उल-बक़ी’ के इन्हिदाम (पवित्र रौज़ों को गिराए जाने) के काले इतिहास और उसके विरोध में आयोजित की गई।
मजलिस को शहर के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना सैयद नवेद हैदर आब्दी साहब ने संबोधित किया।
अपने संबोधन में मौलाना ने जन्नतुल बक़ी के ऐतिहासिक महत्व और पैग़म्बर-ए-इस्लाम की सुपुत्री जनाब-ए-सैयदा (स.अ.) और अन्य पवित्र हस्तियों के मज़ारों (रौज़ों) को गिराए जाने की त्रासदी पर प्रकाश डाला।
मजलिस के समापन के पश्चात मस्जिद-ए-इमामिया के बाहर एक विशाल एहतजाजी प्रदर्शन का (Protest) आयोजित किया गया।
इस प्रदर्शन के माध्यम से मोमिनीन ने जन्नतुल बक़ी में स्थित पवित्र मज़ारों के पुनर्निर्माण की मांग करी।
आयोजक समिति के अनुसार, यह दिन पूरी दुनिया के अज़ादारों के लिए अत्यंत दुखद है।
सभी मोमिनीन ने समय की पाबंदी के साथ भारी संख्या में शिरकत की और मजलिस के माध्यम से वर्तमान इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) को उनकी जद्दा (दादी) का पुरसा (शोक संवेदना) पेश किया। कार्यक्रम के आयोजक सैयद आसिफ हैदर ने सभी अज़ादारों का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

