
झांसी। अयोध्या भगवान के सुदर्शन चक्र पर अवस्थित है और सर्वप्रथम पृथ्वी का पहला नगर है अयोध्या में प्रभु राम सदा निवास करते हैं हमारे बुंदेलखंड का भी सौभाग्य है ओरछा नगर हमारी अयोध्या है। क्योंकि यहां रामराज साक्षात विराजमान है सुंदर भजन कनक भवन दरवाजे पड़े रहो सिया राम जी के द्वार पड़े रहो
अवधवासी राम जी को बहुत प्रिय है सरयू जी की वंदना अयोध्या जी की वंदना कौशल्या जी की वंदना दशरथ जी की वंदना जनक जी की वंदना और उनके परिवार की वंदना का सुंदर व्याख्यान किया
प्रेम क्या है अपने आराध्य प्रभु के सुख का हर स्थिति में चिंतन करना आप अपने प्रेमी का सदैव हित सोचना ही प्रेम है।
क्या बाबा रामदेव का कपालभाति एवं अनुलोम विलोम कर देना योग है जनक जी का योग निर्गुण निराकार है। योग है क्या अपने चिंतन को परमात्मा से जोड़ना ही असली योग है प्रारंभ में नवीन गुप्ता अभी राय स्वतंत्र गुप्ता पंकज गुप्ता प्रमोद दीक्षित ने ग्रंथ की आरती की।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

