झांसी। राष्ट्रीय एकीकरण समिति के तत्वाधान में सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर आज जिला पंचायत अध्यक्ष पवन कुमार गौतम की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन विकास भवन सभागार में किया गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सहित उपस्थित अतिथियों एवं अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा सरदार बल्लभ भाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। तत्पश्चात उनके द्वारा एकता एवं अखंडता की शपथ दिलाई गई।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि आज हम सभी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती को मनाने हेतु यहां पर एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में कई ऐसे महानुभाव हुए हैं, जिन्होंने भारत की उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया है, किंतु कालांतर में इन महानुभावों को समाज में उचित स्थान प्राप्त नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने गुजरात में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की प्रतिमा लिबर्टी ऑफ यूनिटी स्थापित की जिसे देखने दुनिया भर के लोग आते हैं,आज संपूर्ण भारत की एकता स्वरूप सरदार बल्लभ भाई पटेल जी के दृढ़ संकल्प की देन है।
अध्यक्षता कर रही अध्यक्ष जिला पंचायत पवन गौतम ने जिला एकीकरण समिति के सदस्यों के समक्ष झांसी के एक प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, संविधान सभा के सदस्य और लेखक पंडित रघुनाथ विनायक धुलेकर को भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण दिए जाने का प्रस्ताव रखा जैसे सभी सदस्यों ने एक मत से स्वीकार किया।
कार्यक्रम में उपाध्यक्ष/ राज्यमंत्री अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान हरगोविंद कुशवाह ने लोह पुरुष पटेल के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वल्लभभाई झावेरभाई पटेल (31 अक्टूबर 1875 से 15 दिसम्बर 1950), जो सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय थे, एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वे एक भारतीय अधिवक्ता और राजनेता , जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई और एक एकीकृत, स्वतंत्र राष्ट्र में अपने एकीकरण का मार्गदर्शन किया। भारत और अन्य जगहों पर, उन्हें अक्सर हिंदी, उर्दू और फ़ारसी में सरदार कहा जाता था, जिसका अर्थ है “प्रमुख”। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण और 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गृह मंत्री के रूप में कार्य किया।
इस अवसर पर पीठाधीशुअल हरिओम पाठक ने कहा कि सरदार पटेल ने कभी अपने निजी कार्यों की पूर्ति हेतु सत्ता का सहयोग नहीं लिया। उन्होंने बिना किसी रक्त क्रांति एवं हिंसा के रियासतों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। सरदार पटेल शांति, समर्पण एवं सद्भावना के प्रतीक माने जाते हैं। दृढ़ संकल्पी होने के कारण उन्हें लोह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी मोहन नेपाली ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरदार पटेल भारत की एकता के महान शिल्पी थे। उनकी जयंती राष्ट्रीय अस्मिता का बोध कराती है।
इसी क्रम में उप कृषि निदेशक कार्यालय में भी लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती विधि विधान से मनाई गई, जिसमें कार्यालय के सभी अधिकारी कर्मचारियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। जिसमें धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, श्रीदीप कुशवाहा, अनिल कुमार, राजकुमार संजय सिंह
आदि ने अपने विचार प्रकट किए।
आयोजित गोष्ठी संजय पटवारी अध्यक्ष बुंदेलखंड व्यापार मंडल, सुश्री प्रगति शर्मा, सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा
