झांसी। झूठे मुकदमों से निर्दोष लोगों को बचाने के लिए भारत में नए कानून वर्ष 2024 में बीएनएस बनाया गया था। जिसमें झूठे मुक़दमे में निर्दोष नहीं फंस सकेंगे और अपराधी बच नहीं सकेंगे। पुलिस की एफ आई आर से लेकर न्यायालय तक ठोस पैरवी कर अपराधी को सजा दिलाई जाएगी। लेकिन बी एन एस का किस प्रकार पालन हो रहा इसका उदाहरण बीते दिनों थाना सीपरी बाजार में चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुक़दमे से अंदाजा लगाया जा रहा है। जिन चार लोगों को एफ आई आर में आरोपी बनाया गया उनमें से एक आरोपी घटना के कई दिन पूर्व से घटना के दो सप्ताह बाद तक जेल में निरुद्ध रहा, दूसरा आरोपी डॉक्टर के यहां सीसीटीवी कैमरे में उपचार करा रहा था तो तीसरा युवक न्यायालय में अपनी तारीख कर रहा था। फिलहाल मामला सामने आने के बाद पुलिस ने निर्दोष लोगों को क्लीन चिट देने की तैयारी कर ली। लेकिन चरित्र प्रमाण पत्र पर मुकदमे की मोहर लग गई इसका दोषी कौन होगा।
आपको बता दे कि ग्राम करारी निवासी बबलू पुत्र रज्जू ने 5 अगस्त को एसएसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि जमीन को लेकर उनका रिश्तेदार से विवाद चल रहा है। रिश्तेदार अमर सिंह कुशवाह का उसके चचेरे भाई लक्ष्मण से विवाद हो गया था। इस दौरान दोनों को मारपीट में चोट आई थी। लेकिन अमर सिंह ने 28 जुलाई 2026 की सुबह साढ़े दस बजे की घटना दर्शा कर थाना सीपरी बाजार में लक्ष्मण, बबलू पुत्र रज्जू, नीरज,महेश पुत्र रज्जू के खिलाफ शिकायती पत्र दिया। उसने आरोप लगाते हुए बताया कि थाना सीपरी बाजार पुलिस ने बिना जांच पड़ताल किए मारपीट के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया। जबकि घटना के समय नीरज कुशवाहा पुत्र रज्जू 18 जुलाई से पांच अगस्त तक जिला कारागार में निरुद्ध था, बबलू खुद चिकित्सक के यहां सीसीटीवी कैमरे में मौजूद था, महेश जिला न्यायालय में मौजूद था। उन्होंने एसएसपी कार्यालय में शिकायती पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मुकदमा दर्ज करने से पहले मांगी जाती है हल्का इंचार्ज से रिपोर्ट
झांसी। भारत के नए कानून में मारपीट, धोखाधड़ी जैसे अन्य संदिग्ध मामलों में सबसे पहले हल्का इंचार्ज से रिपोर्ट मंगवाने का प्रावधान है। कही ऐसा तो नहीं कि शिकायत कर्ता पेशबंदी के चलते झूठी शिकायत कर रहा हो। इस जांच रिपोर्ट में हल्का इंचार्ज घटना की सत्यता की जांच कर रिपोर्ट थानेदार को सौंपता है, उसके बाद अभियोग पंजीकृत किया जाता है। लेकिन इस मुकदमे में अगर हल्का इंचार्ज से रिपोर्ट मुकदमा दर्ज करने के पूर्व मांगी गई तो उन्होंने मुकदमे में बनाए गए आरोपियों की मौजूदगी कैसे दर्शाई होगी।
चरित्र प्रमाण में पत्र लिखकर आता है मुकदमा
झांसी। भले ही दर्ज मुकदमे में आरोपी की संलिप्तता नहीं पाई जाती है, और उसमें पुलिस एफआर लगाती है। इसके बावजूद जब व्यक्ति चरित्र सत्यापन बनने डालता है तो वह मुकदमा लिखकर आता है और चरित्र प्रमाण पत्र नहीं बन पाता। चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट लगाने वाले एफ आर नहीं मानते उनका कहना होता है न्यायालय से मिली क्लीनचिट लेकर आओ तब रिपोर्ट लगेगी अन्यथा चरित्र सत्यापन निरस्त होगा। ऐसी ही समस्याओं को देखते हुए बीएनएस में मुकदमा दर्ज करने के पूर्व निष्पक्ष जांच हल्का इंचार्ज की रिपोर्ट मांगी जाती है।
मुकदमे में जिनकी संलिप्तता नहीं उन्हें न्याय मिलेगा
झांसी। इस मामले में क्षेत्राधिकारी नगर रामवीर सिंह ने बताया कि सीपरी बाजार थाने में दर्ज मुकदमे में जांच के दौरान जिनकी संलिप्तता नहीं पाएगी उन्हें न्याय मिलेगा। गंभीर अपराध के मामले तो तत्काल लिखे जाते है, मारपीट और अन्य प्रकरण में जांच के बाद ही मुकदमा लिखा जाता है। उन्होंने कहा जो घटना के समय घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे उनके मोबाइल की सीडीआर निकाली जाएगी और संलिप्तता नहीं पाए जाने पर निर्दोषों को न्याय दिया जाएगा।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

