
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के बारहवें दिन शुक्रवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि भक्ति भावों पर निर्भर है। जब हम भावों की विशुद्धि करके भक्ति करते हैं तो पाप कर्मों का क्षय होकर पुण्य उदय होते हैं।
जीव मात्र को पुण्य का बंध होता है। उन्होंने कहा कि हमारे कर्म आत्मा से बंधे होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे दूध में जल मिला हुआ है। राग, द्वेष, ईष्या आदि के माध्यम से हमारे शरीर के भीतर बुरे कर्म आते हैं। जब पुण्य उदय होता है तो हम आनंद मनाते हैं और जब पाप उदय होता है तो दुखी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य की रोशनी आते ही अंधकार दूर हो जाता है उसी प्रकार जीवन में भक्ति आते ही पाप नष्ट हो जाते हैं और उसी भक्ति के प्रभाव से ही हम देवत्व की प्राप्ति कर सकते हैं।
बारहवें दिवस शुक्रवार के पुण्यार्जक नेमिनाथ महिला मंडल गुदरी झांसी रहा जिन्होंने माताजी को शास्त्र भेंट किये एवं पं.दीपक कुमार जैन करैरा के संचालन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कर अर्घ समर्पित किये। प्रात:कालीन शांतिधारा का सौभाग्य अक्षय कुमार जैन कलकत्ता एवं चक्रेश जैन,नीरज जैन, नवीन जैन इंदौर को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर कमेटी के पदाधिकारियों ने कलकत्ता एवं इंदौर से आये श्रद्धालुओं का शाल उड़ाकर एवं पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन एवं करगुवांजी मंत्री शिरोमणि जैन ने किया।अंत में निर्माण मंत्री भागचंद जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर इं बालचंद्र जैन, विनोद जैन, जितेंद्र जैन तालबेहट,सिं.संजय जैन, सुलेखा, गौरव जैन,रानू जैन बघेरा,श्रीमती रानी,सविता , बबीता, कल्पना, कीर्ति, आशि, सुलेखा,अर्चना, विनीता जैन एसडीएम पृथ्वीपुर एवं बाहुबलि जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

