
झांसी। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार भले ही सख्त कानून और त्वरित कार्रवाई के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। ताजा मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती महिला को दहेज की मांग को लेकर ससुराल पक्ष ने बेरहमी से पीटकर घर से बाहर निकाल दिया। पीड़ित महिला का आरोप है कि ससुराल वालों ने उससे दहेज की मांग की और जब वह उसे पूरा नहीं कर सकी तो उसके साथ मारपीट की गई। महिला ने बताया कि उसके पेट में पल रहे बच्चे की परवाह किए बिना उसे लात-घूंसों से पीटा गया और फिर घर से निकाल दिया गया। घटना के बाद वह न्याय की उम्मीद लेकर समथर थाना पहुंची, लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगी। सूत्रों के मुताबिक, महिला कई घंटो से थाने में बैठी है, लेकिन पीड़ित महिला की शिकायत दर्ज नहीं की गई। पीड़िता बार-बार पुलिस से गुहार लगाती रही, लेकिन उसे सिर्फ इंतजार करने को कहा गया। इस दौरान महिला की हालत भी खराब बताई जा रही है, बावजूद इसके पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह मामला न सिर्फ दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई को उजागर करता है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर सरकार महिला सुरक्षा और सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक गर्भवती महिला को थाने में घंटों तक बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार अधिकारियों को महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है। लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर एक गर्भवती महिला की भी थाने में सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

