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आरोपियों को लाभ देने के लिए एफआईआर में नहीं लगाई सही धाराएं, महिला आयोग की जनसुनवाई में आए 22 शिकायती पत्र, छ राजस्व विभाग से संबंधित, सभी को निस्तारित करने के निर्देश

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झांसी। उत्तर प्रदेश के राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में 22 महिला पीड़ितों ने आवेदन दिए। जिसमें छह आवेदन राजस्व विभाग से संबंधित थे। सुनवाई के दौरान कुछ आवेदनों का निस्तारण मौके पर किया गया। अन्य आवेदनों को संबंधित विभागों को गुणवत्ता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। वही एक मामला महिला थाना से संबंधित ऐसा आया कि जिसमें दी गई तहरीर के आधार पर महिला थाना पुलिस ने सही धाराओं में मुकदमा दर्ज न कर मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। जिस पर पीड़िता ने पुलिस पर आरोपियों को लाभ देने का आरोप लगाकर जानबूझ कर मुकदमे में सही धाराएं नहीं लगाने का आरोप लगाया।

मंगलवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य अनुपमा लोधी ने विकास भवन में पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए जनसुनवाई आयोजित की। इस दौरान राज्य महिला आयोग की सदस्य ने पीड़ित महिलाओं की शिकायतें सुनी। जिसमें सर्वाधिक शिकायतें ससुरालियों से पीड़ित महिलाओं की थी। जिन्हें सुनवाई के बाद महिला थाना पुलिस को निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। अन्य मामले राजस्व विभाग से जुड़े थे जिन्हें संबंधित राजस्व विभाग को भेज कर निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्नाव गेट निवासी एक युवती ने जनसुनवाई में आवेदन देते हुए बताया कि उसके सीपरी बाजार नंदनपुरा निवासी ससुरालियों ने उसका कई महीने तक लगातार उत्पीड़न किया ओर उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसका गर्भपात करवा दिया। इस संबंध में महिला थाना पुलिस ने उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की थीं लेकिन आईजी के निर्देशन पर महिला थाना पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की। लेकिन जो तहरीर दी गई थी उस तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं। युवती ने आरोप लगाया कि जब महिला थाना प्रभारी से इस संबंध में शिकायत की तो उनका कहना था कि मेरी मर्जी से एफआईआर लिखेगी तुम्हारी मर्जी से धाराएं नहीं लिखी जाएगी। जिस पर पीड़िता ने महिला थाना प्रभारी से आग्रह किया था कि आप विधिक राय ले लीजिए क्या हमारे द्वारा बताई गई धाराएं इसमें लगेंगी या नहीं। इस पर महिला थाना प्रभारी ओर विवेचना अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया ओर जल्दबाजी कर बयान नक्शा नजरी बनाकर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़िता ने जन सुनवाई में बताया या तो एफआईआर लेखक को धाराओं का ज्ञान नहीं या फिर महिला थाना पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए जानबूझ कर धाराएं सही नहीं लगाई। इस पर जनसुनवाई कर रही राज्य महिला आयोग की सदस्य ने महिला थाना पुलिस को सुसंगत धाराओं की वृद्धि कर निष्पक्ष विवेचना करने के निर्देश दिए है। इस दौरान पुलिस ओर प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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