March 4, 2024

विधान सभा का विकास नल के पानी में आ रही वास

झांसी। विधान सभा चुनाव नजदीक आते ही प्रत्याशी विकास कार्यों को लेकर मतदाताओं की चौखटों तक पहुंच रहे। विकास कार्यों की झड़ी तो ऐसे गिना रहे जैसे सोने की चिड़िया बना दिया हो। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। आज़ादी के 70 साल बाद भी बबीना विधान सभा का एक ऐसा क्षेत्र है जहां के क्षेत्र वासी आज भी मूलभूत सुविधा पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे है। इस संघर्ष से जूझते हुए बुजुर्ग महिलाएं और बच्चों को भी देखा जा रहा है। पानी के लिए किलो मीटर दूर साइकिल से हैंडपंप से पानी भरकर लाने वालो से पूछने पर जानकारी मिलती है की बबीना विधान सभा को विकास कैसों जब घर के नल में आने वाला पानी बदबू दार है। पीने योग्य पानी नही इसलिए दूर तक मेहनत करते हुए हांफते हुए पानी के लिए संघर्ष कर घर तक पानी लाते है। जी हां हम बात कर रहे बबीना विधान सभा के ग्राम रक्सा की। एक और जहां केंद्र सरकार की हर घर नल हर घर जल की योजना परियोजना को विकास कार्य के एजेंडे में जोड़कर प्रत्याशी मतदाताओं के बीच वोट मांगने जा रहे है। वहीं रक्सा क्षेत्र के कई गांव ऐसे है जहां आजादी के 70 साल बाद भी ग्रामीण पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे। ग्राम इमलिया निवासी एक बुजुर्ग अपनी साइकिल पर घर से एक किलो मीटर दूर साइकिल पर दो डिब्बे टांग कर हांफते हांफते अपने घर तक पानी ले जा रहे। जब उनसे बात की गई की भाजपा सरकार ने हर घर नल हर घर जल की व्यवस्था करा दी है तो उनका कहना था घर में जो नल लगा है उसका पानी पीने के योग्य नहीं उसमे बदबू आती है। क्योंकि जिस बांध से उनके नलों में पानी आता है उसमे जानवर नहलाए जाते है। उन्होंने बताया की करीब दस वर्षो से इसी प्रकार दूर से पानी लाकर पीते क्योंकि पांच साल हो गया उनके पुत्र को रोजी रोटी कमाने के लिए घर से बाहर गए हुए पहले उनका पुत्र पानी भरता था अब वह भरते है। यह तो रक्सा क्षेत्र के एक ही बुजुर्ग 75 वर्षीय है जो रोज पानी के लिए हांफते हांफते संघर्ष कर रहे। अगर आप उस क्षेत्र में जायेंगे तो आपको बच्चे बूढ़े और महिलाएं भी पानी के लिए घंटो हैंडपंप और नहरों के पास साइकिल ठेला से पानी भरकर लाने का इंतजार करती दिखाई देंगे। जिनके दर्द प्रतिनिधियों को नहीं दिखेंगे। बस विकास के नाम पर वोट मांगने जरूर जाएंगे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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