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गवाह मुकरे, वादी और फोरेंसिक जांच से हत्यारोपियों को सुनाई गई आजीवन कारावास 

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झांसी। दस वर्ष पूर्व हरि शंकर हत्याकांड के आरोपियों को न्यायलय अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय कक्ष संख्या दो झांसी देवाशीष की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में समस्त गवाहों के मुकर जाने के बाद भी अभियोजन की और से फोरेंसिक जांच और वादी का बयान महत्वपूर्ण रूप से न्यायालय में रखने पर आरोपियों पर हत्या का सिद्ध हो गया था।

अभियोजन की और पैरवी कर रहे एडीजीसी संजय देव शर्मा ने बताया कि कोतवाली छनियापुरा निवासी महिला श्रीमती विनीता ने थाना नवाबाद में आठ अक्टूबर 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि वह अपने पति हरि शंकर के साथ कोछाभांवर में रहने वाले अपने रिश्तेदार महेश के यहां निमंत्रण में खाना खाने गई थी। तभी वहां मौजूद बांदा के बिजली खेड़ा निवासी हरि बाबू, नवाबाद के कोछाभांवर निवासी रोहित, अंतर सिंह, प्रभु दयाल, उसके पति को आयोजन से बाहर ले गए और टेंट के पीछे ले गए जहां ले जाकर हरि शंकर को तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपियों को जेल भेज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। सुनवाई के दौरान कई गवाह पेश हुए और मुकर गए। लेकिन अभियोजन की और से फोरेंसिक जांच रिपोर्ट और वादी की गवाही को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। जिस पर आरोपियों पर हत्या का आरोप सिद्ध हो गया। न्यायालय ने फोरेंसिक जांच और वादी ठोस आधार मनाते हुए सभी आरोपियों को आजीवन कारावास और बीस बीस हजार अर्थदंड का आदेश सुनाया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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