प्रयागराज/झांसी। झांसी की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के कथित अपहरण और डेढ़ महीने से अधिक समय तक बरामदगी न होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय ने राज्य सरकार और झांसी पुलिस को निर्देश दिया है कि नाबालिग को 17 अगस्त 2026 को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि अपहृता की बरामदगी के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए और अब तक सफलता क्यों नहीं मिली।
मामला हेबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 1084/2026 से जुड़ा है। याचिका नाबालिग निन्सी अहिरवार की और से उसकी मां भारती ने अपने विद्वान अधिवक्ता कार्तिकेय शुक्ला ने दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पड़ोस में रहने वाला कृष्णकांत मलोटिया नाबालिग का लगातार पीछा करता था तथा उसके परिवार की महिलाओं द्वारा भी उसे परेशान किया जाता था। इसी संबंध में 7 जून 2026 को पहली एफआईआर थाना प्रेमनगर में दर्ज कराई गई थी।
याचिका के अनुसार, 12 जून 2026 की रात नाबालिग को कथित रूप से बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया। परिवार ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उच्च अधिकारियों से शिकायत करने पर 23 जून 2026 को थाना प्रेमनगर, जनपद झांसी में केस क्राइम संख्या 283/2026 धारा 87 एवं 137(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई।
याचिका में यह भी कहा गया है कि नाबालिग की जन्मतिथि 24 मई 2009 है और हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार वह नाबालिग है। आरोप लगाया गया है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण अब तक उसकी बरामदगी नहीं हो सकी। साथ ही यह भी प्रार्थना की गई है कि नाबालिग को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराया जाए तथा यदि वह प्रतिवादियों के कब्जे में है तो उसे मुक्त कराया जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि नाबालिग अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। इस पर न्यायमूर्ति संदीप जैन ने स्पष्ट आदेश दिया कि 17 अगस्त 2026 तक लड़की को कोर्ट में पेश किया जाए। यदि पुलिस ऐसा करने में असफल रहती है तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा देकर अपने प्रयासों का पूरा विवरण देना होगा।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी। उस दिन यह स्पष्ट होगा कि पुलिस नाबालिग की बरामदगी में सफल हुई या नहीं तथा न्यायालय आगे क्या निर्देश जारी करता है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

