
*झांसी।* रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, में *”सतत् आजीविका हेतु वैज्ञानिक दुग्ध उत्पादन”* विषय पर तीन दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन प्रबंधन एवं समेकित कृषि प्रणाली के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान* ने ऑनलाइन माध्यम से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक पशुपालन आज समय की आवश्यकता है।
उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से निरंतर संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण, रोग नियंत्रण, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन एवं वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने सीमांत एवं लघु किसानों के लिए बकरी पालन को अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बताते हुए समेकित कृषि प्रणाली अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रयोगशाला से खेत तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी प्रसार का सशक्त माध्यम हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने कहा कि भारत को वर्ष 2030 और विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक पशुपालन को जन-जन तक पहुंचाना होगा।
उन्होंने बताया कि डेयरी व्यवसाय में लगभग 70 प्रतिशत लागत पशु आहार पर व्यय होती है, इसलिए संतुलित आहार, हरे चारे का उत्पादन, साइलेज निर्माण और चारा बैंक की स्थापना लाभकारी दुग्ध उत्पादन की कुंजी है। उन्होंने आनुवंशिक सुधार एवं वैज्ञानिक प्रजनन प्रबंधन को जलवायु परिवर्तन के दौर में सतत एवं अधिक उत्पादन का आधार बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि आधुनिक डेयरी तकनीकों का दक्षता आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर किसान उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अपनी आय में स्थायी वृद्धि कर सकते हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने कहा कि सीखने की कोई आयु नहीं होती। किसानों को नई तकनीकों को अपनाकर कृषि एवं पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाना चाहिए।
उन्होंने किसानों की जिज्ञासा और सीखने की ललक की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, दतिया के अधिष्ठाता डॉ. पीके पाण्डेय ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों एवं प्रतिभागी किसानों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं कृषि के अन्य संबद्ध क्षेत्रों में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा,
इससे नवीन वैज्ञानिक तकनीकों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और उनकी आय एवं आजीविका में सतत वृद्धि सुनिश्चित हो।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक दुग्ध उत्पादन, पशु पोषण, रोग प्रबंधन, प्रजनन तकनीक, चारा उत्पादन तथा समेकित कृषि प्रणाली से संबंधित आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

