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दिव्यांगता नहीं है बाधा, आत्मविश्वास ही है सबसे बड़ी साधना : जिलाधिकारी भ्रमण के दौरान बच्चों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट्स और पेंटिंग का किया अवलोकन, बढ़ाया मान

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झांसी। आज जिलाधिकारी गौरांग राठी ने बबीना कैंट झाँसी में संचालित आशा स्कूल (जहाँ अलग अलग दिव्यांग बच्चों को सक्षम बनना सिखाया जाता है) का निरीक्षण किया।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं बल्कि शारीरिक या मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को संवेदनशीलता, समान अवसर और उचित सम्मान की आवश्यकता होती है।उन्होंने कहा समाज में दिव्यांगजनों को सहानुभूति के बजाय बराबरी का हक मिलना चाहिए ताकि वे अपने आत्मविश्वास के बल पर आगे बढ़ सकें।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि दिव्यांग जन को समाज की नई सोच से मुख्यधारा धारा से जोड़ना है सहानुभूति से नहीं, हम दिव्यांग को दया की दृष्टि से देखने के बजाय उनके अधिकारों और समान भागीदारी का समर्थन करें। उन्हें प्यार, मधुर व्यवहार और आदर देकर उनके भीतर छुपी प्रतिभा को बाहर लाने में मदद करें और खेल, कला, संगीत और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए उनकी कमजोरी को उनकी ताकत में बदलें। भ्रमण के दौरान उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट्स और पेंटिंग आदि का अवलोकन करते हुए उत्साहवर्धन किया।

भ्रमण के दौरान कमांडिंग ऑफिसर अमित दुग्गल द्वारा जानकारी दी गई कि आशा स्कूल विशेष बच्चों को, उनकी दिव्यांगता की परवाह किए बिना, एक विद्यालय के वातावरण में आवश्यक सुविधाएं और योग्य शिक्षक प्रदान करना, जो पाठ्यचर्या अनुकूलन, व्यक्तिगत सहायता, पुनर्वास चिकित्सा और माता-पिता की भागीदारी के माध्यम से सीखने की सुविधा प्रदान करता है। स्कूल का मुख्य उद्देश्य जीवन कौशल, सामाजिक कौशल और आजीविका कौशल के विकास के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता को पोषित करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

कमांडिंग ऑफिसर श्री अमित दुग्गल ने बताया कि यह विद्यालय छात्रों को उनकी अधिकतम क्षमता तक शैक्षिक अवसर प्रदान करता है, ताकि मुख्यधारा की संस्थाओं में उनके पुनर्वास की संभावनाओं में सुधार हो सके। यह विद्यालय वयस्क जीवन में अधिक आत्मनिर्भरता के लिए दिव्यांग बच्चों के संचार और सामाजिक कौशल में सुधार को विशेष प्रोत्साहन देता है। यह विद्यालय उचित फिजियोथेरेपी प्रदान करके बच्चे की शारीरिक क्षमता में सुधार करना है, साथ ही मानसिक क्षमता के निरंतर विकास के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को सुनिश्चित करता है।

उन्होंने आशा स्कूल की जानकारी देते हुए बताया कि यह विद्यालय बच्चे को दिव्यांगता को कम करने और यदि संभव हो तो उस पर काबू पाने में मदद करने के लिए उपकरण/उपकरण/कृत्रिम अंग प्रदान करता है, विद्यालय विशेष शिक्षा, चिकित्सा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, खेलकूद, भ्रमण और सांस्कृतिक गतिविधियाँ प्रदान करता है, जो दिव्यांग बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। पाठ्यक्रम राष्ट्रीय दिव्यांगजन संस्थान द्वारा निर्धारित पैटर्न पर आधारित है। इसके अतिरिक्त, बच्चों को दिन के भोजन और स्कूल बस की सुविधा भी प्रदान की जाती है।

जिलाधिकारी गौरांग राठी ने स्कूल से विदा लेते हुए बच्चों, आशा स्कूल के संचालकों और शिक्षकगणों का उत्साहवर्धन किया। स्कूल के संचालन और बच्चों की सहायता हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

इस अवसर पर भ्रमण के दौरान स्टेशन कमांडर सहित अनेकों बच्चे और शिक्षक सहयोगी कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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