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कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्ष गांठ पर आयोजित कवि-सम्मलेन में बही देश प्रेम की धारा  उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया सैनिकों का सम्मान

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देहरादून । कारगिल विजय दिवस पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने जहाँ एक औऱ सैनिकों का सम्मान किया वही दूसरी औऱ कवियों ने अपनी कविताओं से राष्ट्रभक्ति का समा बाँध दिया l देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के डॉ. अनिल दीक्षित ने अपनी ओजस्वी कविता “धरा पे गंगा गगन तिरंगा है हमारी शान, देश के खातिर मिटने वाले सैनिक तुम्हे सलाम ” का पाठ किया

मंच का संचालन कर रहे कान्त शर्मा ने महाभारत में कृष्ण एवं गांधारी के मर्म स्पर्श करने वाले वृतांत का वर्णन अपने रचना के जरिये किये किया , दिल्ली से आये कवि गजेंद्र सोलंकी ने वीर रस की कविता पाठ करते हुए युवाओं को मातृभूमि के पुजारी अर्थात सैनिकों का सदैव सम्मान करने की प्रेरणा की बिहार के मधुबनी से आई कवित्री वर्षा ठाकुर ने आज समाज में नारी शक्ति के शोषण पर कविता पाठ करते हुए कहा “अबला नहीं मै नारी हूँ, हालातों से कभी नाहारी हूँ ”

इससे पूर्व सैनिकों का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिँह धामी ने कहा कि,कारगिल युद्ध में भारत के 527 वीर सैनिक शहीद हुए थे, जबकि 1,300 से अधिक जवान घायल हो गए थे। लगभग 60 दिनों तक चली इस जंग में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान द्वारा कब्जाई गई सभी ऊंची चोटियों को वापस छीन लिया था। तत्कालीन अटल बिहार ज़ी की सरकार ने इन्हीं जांबाज सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद करने और उनकी वीरता का सम्मान करने के लिए हर साल 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाने का निर्णय लिया था ।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी, सम्मानित कविगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रदेशवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कवित्री महीमा ने सभी श्रोताओं एवं सम्मानित सैनिकों का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री धामी के प्रति कृतज्ञता अर्पित की l

ब्यूरो रिपोर्ट देहरादून

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