
झांसी। अगर होटलों में पूजन करने से भगवान मिलते है, और बफर सिस्टम करने को भंडारा कहते है तो पहाड़ों पर भोलेनाथ नहीं होते और जगह जगह उनके शिष्यों को पत्तल में भोजन प्रसाद नहीं मिलता।
एक और जहां बदलते भारत में युवा युवती फैशन की होड़ में भारतीय संस्कृति को छोड़ अंग्रेजों के नक्शे कदम पर चल रहे है। जिस पर इन युवा युवतियों को अंग्रेजों के नक्शे कदम छोड़ हिंदुत्व की और ले जाने का कई बड़े साधु संत महात्मा और सरकार भी प्रयास कर रही है। इसी के चलते साधु संत महात्मा देश विदेश छोड़ कर अपने शिष्यों को आशीर्वाद और धर्म के रस्ते पर ले जाने के लिए अपनी कुटिया में पहुंच जाते है, और वही उनके शिष्य पूजन अर्चन कर भंडारा प्रसाद ग्रहण करते है। लेकिन बुंदेलखंड में आज कल एक बाबा जी कही चर्चाओं में बने हुए है। हाल ही में सैकड़ों नेताओं, जमीन कारोबारियों, के गुरु चर्चाओं में आने के बाद लोगों को पता चला कि बाबा जी महात्मा के साथ कारोबार भी करते है। ग्लैमर की दुनिया में बाबा जी चमक धमक बरकरार रहे इसके लिए इस बार बाबा जी के शिष्यों ने अच्छा प्रबंध कर रखा है। इस बार बाबा जी की गुरुपूर्णिमा पर पूजा अर्चना किसी धार्मिक स्थल, या कुटिया में नहीं बल्कि बाबा जी की पूजा आलीशान होटल में होगी। वही शिष्यों को भंडारा प्रसाद की जगह होटल में बफर सिस्टम खाना मिलेगा। जिसे भंडारा प्रसाद का नाम दिया जाएगा। अगर आलीशान होटलों में पूजन करने से भगवान मिलते और बफर सिस्टम में खाना खाने से भंडारे का प्रसाद कहते हो पहाड़ों के बीच बाबा बर्फानी, बाबा केदारनाथ नहीं बैठे होते, और उनके पास पहुंचने वाले भक्तों को जगह जगह टेंट में पत्तलों पर भोजन प्रसाद नहीं मिलता। ऐसे ही बाबा की वजह से आज हिंदू संस्कृति गुम होती जा रही लोग धर्म का रास्ता छोड़ लग्जरी लाइफ के लिए मंदिरों में खाना छोड़ कर होटलों में बफर कर रहे है। उदाहरण के तौर पर आपको बता दे कि आज भी श्रीकुंज बिहारी जी मंदिर, स्कोन मंदिर में गुरुपूर्णिमा हो या कोई भी धार्मिक पर्व, मंदिर प्रांगण में ही महात्माओं की ओर भगवान की पूजा अर्चना के साथ वही जमीन पर बैठ कर पत्तल में भोजन प्रसाद मिलता है, जिसे ग्रहण करने के बाद हर व्यक्ति यही कहता है भगवान की कृपा से प्रसाद मिल गया।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

