
झांसी। जून 15, 2026: एडवांस्ड रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के लाइफ लाइफ चेंजिंग बेनिफिट्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली ने आज एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के ऑर्थोपेडिक्स एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी विभाग के डायरेक्ट, डॉ. अखिलेश यादव उपस्थित रहे। उनके साथ झांसी की श्री शरद शिवहरे (60) और श्रीमती लक्ष्मी सिंह (60) भी मौजूद रहीं, जिन्होंने मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली में सफलतापूर्वक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करवाई और अब सक्रिय तथा पेन-फ्री लाइफ जी रहे हैं।
इसी तरह, शरद शिवहरे वर्ष 2024 से दोनों घुटनों में गंभीर आर्थराइटिस की समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती थी और रात में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता था। स्थिति बिगड़ने के साथ सामान्य गतिविधियां भी चुनौतीपूर्ण हो गई थीं। उन्होंने रोबोटिक बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी करवाई, जिसमें अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक की मदद से इम्प्लांट की अत्यंत सटीक पोजिशनिंग और जॉइंट बैलेंसिंग सुनिश्चित की गई। सर्जरी और रिहैबिलिटेशन के बाद उनकी गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
श्रीमती लक्ष्मी सिंह भी वर्ष 2020 से दोनों घुटनों के एडवांस्ड ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थीं। लगातार दर्द और सीमित गतिशीलता के कारण उनकी स्वतंत्रता और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद उनकी कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वे आराम से चलने-फिरने के साथ दैनिक कार्यों को आत्मविश्वास के साथ करने लगीं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के ऑर्थोपेडिक्स एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी विभाग के डायरेक्ट, डॉ. अखिलेश यादव ने कहा, “जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की वास्तविक सफलता केवल एक्स-रे या सर्जिकल परिणामों से नहीं मापी जाती, बल्कि उससे मापी जाती है कि मरीज अपनी सामान्य जिंदगी में लौटकर कितना आत्मविश्वास और खुशी हासिल करते हैं। रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ने ऑर्थोपेडिक उपचार को नई दिशा दी है। यह तकनीक अत्यंत सटीक इम्प्लांट प्लेसमेंट और मरीज की जरूरतों के अनुरूप सर्जिकल प्लानिंग की सुविधा देती है। इससे जॉइंट की कार्यक्षमता बेहतर होती है, रिकवरी तेज होती है और घुटना अधिक प्राकृतिक महसूस होता है। किसी मरीज को फिर से स्वतंत्र रूप से चलते हुए और दर्द के कारण छोड़ी गई गतिविधियों को दोबारा करते देखना किसी भी सर्जन के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।”
घुटनों का आर्थराइटिस बुजुर्गों में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। लगातार दर्द, अकड़न और गतिशीलता में कमी के कारण लोग अपनी दैनिक गतिविधियों को सीमित करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। हालांकि, रोबोट- असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में हुई प्रगति ने अत्यधिक व्यक्तिगत और सटीक उपचार को संभव बनाया है। इससे इम्प्लांट की बेहतर पोजिशनिंग, तेज रिकवरी और लंबे समय तक बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। यह तकनीक सर्जन की विशेषज्ञता को कंप्यूटर-गाइडेड प्लानिंग के साथ जोड़कर जॉइंट की सही अलाइनमेंट और संतुलन सुनिश्चित करती है, जिससे मरीजों को बेहतर कार्यात्मक परिणाम और अधिक संतुष्टि मिलती है।
डॉ. अखिलेश यादव ने आगे कहा, “बहुत से लोग यह मानकर घुटनों के दर्द को सहते रहते हैं कि यह बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा है, जबकि ऐसा नहीं है। आज रोबोट-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट प्रोसीजर्स आर्थराइटिस और गतिशीलता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और अत्यंत सटीक समाधान प्रदान करती हैं। समय पर उपचार से वर्षों की विकलांगता को रोका जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। जिन लोगों को लगातार घुटनों में दर्द, सूजन, अकड़न, विकृति या चलने-फिरने में कठिनाई हो रही है, उन्हें विशेषज्ञ से जल्द परामर्श लेकर उपलब्ध उपचार विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

