झांसी। प्रेम प्रसंग में धोखा मिलने ओर पैसे की मांग पूरी नहीं करने के कारण हो रहे उत्पीड़न से त्रस्त प्रेमी द्वारा आत्महत्या करने की घटना में आरोपी बनाए गई प्रेमिका को न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है। इसके चलते मृतक की प्रेमिका को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा।
अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता केशवेंद्र प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 6 फरवरी 2026 को एक महिला ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसके छोटे पुत्र तुषार पाखरे का सात वर्षों से छनियापुरा निवासी युवती सौम्य साहू से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों की शादी की बात भी तय हो गई थी। उसका पुत्र तुषार मंडी में कार्य करता था बाद में वह शिवम कलर लैब पर कार्य करने लगा था और सौम्य को हर माह आर्थिक मदद भी करता था। बाद में परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने पर तुषार ने सौम्या साहू को आर्थिक मदद देनी बंद कर दी थी। जिससे सौम्या उसके पुत्र को नीच जाती का कहकर दूरियां बनाने लगी थी और उसके पुत्र को पैसे न देवे पर लगातार प्रताड़ित कर रही थी। जिससे उसका पुत्र अवसाद ने रहने लगा था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि 6 फरवरी को ऋषि तिवारी सौम्य साहू को तुषार के पास घर पर छोड़ गया। जहां सौम्य ने तुषार को प्रताड़ित किया अपशब्द कहे। जिससे दुखी होकर तुषार ने सौम्या के दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सौम्य साहू को जेल भेज दिया था। आज आरोपी सौम्य की ओर जमानत प्रार्थना प्रस्तुत किया गया। जिसकी सुनवाई के बाद न्यायालय ने उसे जमानत देने से इनकार करते हुए उसका जमानती प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

