Home Uncategorized पापों से बचकर पुण्य की विशुद्धि वढायें : विशाश्री माताजी

पापों से बचकर पुण्य की विशुद्धि वढायें : विशाश्री माताजी

14
0

झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के चालीसवें दिन शुक्रवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल‌ देशना देते हुए कहा कि भगवान की आराधना से सब कुछ प्राप्त होता है बस धैर्य की आवश्यकता है। वीरांगना की नगरी झांसी में चातुर्मास के दौरान हो रहे भक्तामर महामंडल आराधना विधान को बड़ा आयोजन बताते हुए उन्होंने कहा कि झांसी सहित बुंदेलखंड के लोग बडे भाग्यशाली हैं जो यहां बड़ी संख्या में साध्वियों का चातुर्मास हो रहा है। उन्होंने कहा कि साधु विषम परिस्थितियों में भी अपनी साधना, आराधना और स्वाध्याय नहीं छोड़ते। शरीर भले ही संकट में हो पर वे कदापि विचलित नहीं होते। समुद्र की गंभीरता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र में कितनी भी नदियां चारों से गिरती हैं पर वह अपनी गंभीरता नहीं छोड़ता। चातुर्मास के दौरान इस शुभ समागम में हो रही धर्म प्रभावना से अपने पुण्य की झोलियां भरना चाहिए। जीवन को दुर्गति या अधोगति में न ले जाने की सलाह देते हुए विशाश्री माताजी ने कहा कि पवित्र भावना के साथ धर्म की रक्षा करें तथा पापों से बचते हुए पुण्य की विशुद्धि वढाये। इससे पूर्व गुरुवार के पुण्यार्जक श्रीमती हेमलता ऋषभ कुमार जैन, श्रीमती शैली सिद्धार्थ जैन,शाश्वत, स्वस्ति समस्त परिवार चिरगांव रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन कर पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये।

तदुपरांत पुण्यार्जक परिवारों का माला एवं पगड़ी पहनाकर दिगम्बर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।संचालन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन लोकपथ एवं करगुवांजी मंत्री एड.शिरोमणी जैन ने संयुक्त रूप से किया।अंत में विधि सलाहकार अशोक जैन ने सभी का आभार व्यकत किया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here