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झांसी में सरकारी जमीन पर डाका! डंडियापुरा में बंजर भूमि (गाटा 1412) हड़पने का खेल, DM चौखट पर पहुंचे ग्रामीण

झांसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले भू-माफियाओं पर बुलडोजर चलाने और ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भरते हैं, वहीं उन्हीं के प्रशासनिक अमले के कुछ अफसर और कर्मचारी इस नीति को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।ताजा और सनसनीखेज मामला जनपद झांसी की सदर तहसील अंतर्गत ग्राम डडियापुरा से सामने आया है, जहां श्रेणी 14-3(ड़) में दर्ज करोड़ों रुपये की मूल्यवान सरकारी बंजर भूमि (गाटा संख्या 1412/1) को भू-माफियाओं के हवाले करने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है।राजस्व खतौनी के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, गाटा संख्या 1412/1 (रकबा 1.214 हेक्टेयर व 0.312 हेक्टेयर) श्रेणी 14-3(ड़) ‘बंजर/झाड़ियों’ के नाम दर्ज पूरी तरह से राज्य सरकार और ग्राम सभा की संपत्ति है। उत्तर प्रदेश भूमि लेख नियमावली के नियम (पैरा 124) के तहत इस श्रेणी की भूमि का कोई भी निजी क्रय-विक्रय या बेनामा कानूनन ‘स्वतः शून्य’ (Void) होता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि भू-माफियाओं ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए इस सरकारी बंजर जमीन के फर्जी बेनामे करवा लिए और खुलेआम अवैध निर्माण शुरू कर दिया।जब पीड़ित शिकायतकर्ता ने इस बड़े भू-घोटाले की शिकायत आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज कराई, तो क्षेत्रीय लेखपाल का रुख देखकर हर कोई दंग रह गया।सरकारी संपत्ति की रक्षा करने के बजाय, संबंधित लेखपाल ने 04 सितंबर 2026 की अपनी जांच रिपोर्ट में खुद यह स्वीकार किया कि जमीन सरकारी खतौनी में ‘बंजर’ दर्ज है, लेकिन मौके पर बिना कोई वैज्ञानिक या राजस्व नाप-जोख किए, मामले को “दीवानी (Civil) प्रकार का आपसी विवाद” बताकर फाइल बंद कर दी।वहीं कानूनी जानकारों का मानना है कि सरकारी बंजर भूमि पर कब्जे के मामले को “सिविल विवाद” बताना सीधे तौर पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने और सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द होने देने का प्रशासनिक षड्यंत्र है।सरकारी बंजर भूमि (गाटा 1412) पर अवैध बेनामों और बाउंड्रीवॉल की आड़ में अब भू-माफियाओं की नजर साथ लगी ग्रामीणों की निजी संक्रमणीय जमीनों (गाटा संख्या 1413 व 1421) पर भी टिक गई है। पीड़ित रमज़ान वारसी व उनके परिजनों ने बताया कि मेड़ों को दबाकर उनकी पुश्तैनी जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है।शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस) के अवसर पर जब पीड़ित और इलाका के लोग एकजुट होकर जिलाधिकारी झांसी के सामने पहुंचे, तो पूरे तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। पीड़ित और मोहल्लेवासी ने लेखपाल की भ्रामक आख्या को निरस्त करने, दोषी राजस्व कर्मियों की जांच कराने और गाटा 1412 को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए विशेष आपत्ति पत्र सौंपा है।पीड़ितों की मांग है कि गाटा 1412 (सरकारी बंजर भूमि) पर दर्ज फर्जी बेनामों की उच्चस्तरीय जांच हो और उ०प्र० राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत तत्काल बेदखली कर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। गाटा 1412 (बंजर) और किसानों की निजी भूमि (1413 व 1421) की सीमा तय करने के लिए आधुनिक डिजिटल (DGPS) तकनीक से निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए। भू-माफियाओं से साठ-गांठ कर गलत जांच रिपोर्ट लगाने वाले राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। वही जिलाधिकारी ने पूरे मामले को सुनते मौके टीम भेज जांच किये जाने के आदेश दिए है।अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस संगठित भू-माफिया कॉकस पर क्या सख्त कदम उठाता है या फिर ‘बंजर भूमि’ यूं ही कागजों और कब्जों के खेल में बलि चढ़ती रहेगी।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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