May 20, 2024

समग्र स्वास्थ्य के लिये जरूरी है संयमित जीवन शैली : मण्डलायुक्त

झांसी। भारतीय चिकित्सा पद्धति एक ऐसी चिकित्सा पद्धित है जिससे न केवल रोगों का उपचार संभव है बल्कि इन्हें अपनाने से निरोगी होने का मार्ग भी प्रशस्त होता है। भारतीय चिकित्सा पद्धति जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, योग आदि चिकित्सा पद्धतियाँ शामिल है के प्रतिपादित नियमों के अनुसरण से जीवनशैली में परिवर्तनों के द्वारा जनमानस को निरोगी बनाया जा सकता है। उक्त बातें बिमल कुमार दुबे आयुक्त झाँसी मण्डल ने आज राष्ट्रीय आयुष मिशन, उ.प्र. के अन्तर्गत कैस्केडिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कहीं। मण्डलायुक्त ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति का व्यापक प्रचार-प्रसार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में किये जाने से नागरिकों में स्वस्थ जीवन प्रणाली विकसित होगी। आधुनिक जीवन शैली के दुष्परिणाम के रूप में अनेक संचारी व गैर संचारी बीमारियाँ बढ़ी हैं जिससे मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ भी बढ़ा है। आम-जनमानस द्वारा भारतीय चिकित्सा पद्धितियों के सूत्रों को अपनाने से उच्च चिकित्सा संस्थानों में मरीजों का बढ़ता दबाव बहुत हद तक कम हो सकेगा। प्राचीन भारत में इन पद्धितियों को रोगों के उपचार और स्वस्थ जीवन शैली व्यतीत करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता था। इसे अपनाकर हर नागरिक न केवल रोगों से दूर रह सकता हैं, बल्कि एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का आनन्द भी ले सकता हैं।झाँसी मण्डल के तीनों जनपदों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों (सामुदायिक स्वास्थ्य) को राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जन स्वास्थ्य, संचारी, गैर-संचारी रोगों के बचाव, उपचार एवं पुर्नवास के संबंध में दो दिवसीय प्रशिक्षण श्री ट्रान इण्डिया के सहयोग से दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों को बीमारियों के रोकथाम में आयुर्वेद की भूमिका के बारे में जानकारी दी जायेगी। कार्यक्रम के दौरान आयुक्त ने कहा कि सभी आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों को आयुर्वेद के मूल सिद्धांत को गहराई से समझने की जरूरत है जिससे कि वे अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को केवल चिकित्सा उपचार सेवाओं तक सीमित न रहकर आम जनमानस को जागरूक कर सकें। मण्डलायुक्त ने चिकित्साधिकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए यह कहा कि यदि हम प्रतिदिन अपने कार्य क्षेत्र में ग्राम स्तर पर गोष्ठियों का आयोजन कर ग्रामीणों को स्वस्थ जीवन प्रणाली की ओर प्रोत्साहित करें तो आपकी सामाजिक उपयोगिता बढ़ेगी और आत्मसम्मान में भी वृद्धि होगी। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों (सामुदायिक स्वास्थ्य) से आवाह्न किया कि वे अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के क्षेत्र के गाँवों की ऐसी वार्षिक कार्ययोजना का निर्माण करें जिसमें गोष्ठियाँ एवं जागरूकता शिविर नियमित रूप से आयोजित हो सकें। इन शिविरों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर व अन्य बीमारियों से बचने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की जाये। बैठक में अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. सुमन, सी.एम.ओ. डा. सुधाकर पाण्डेय, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी, ए.सी.एम.ओ. डा. एन.के. जैन, एन.एच.एम. के मण्डलीय परियोजना प्रबंधक आनन्द चौबे, डा. अजय भाले, डा. रमाकान्त आदि उपस्थित रहे। डा. सतीश चन्द्रा ने प्रशिक्षण दिया एवं डा. विजय शुक्ला ने संचालन किया। प्रशिक्षण में झाँसी, जालौन एवं ललितपुर जनपद के लगभग 50 एम.ओ.सी.एच. ने भाग लिया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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