May 24, 2024

अधिकारी भ्रमण के दौरान किसान को खेत में आग ना लगाने की जानकारी दें, आग लगाने से खेत में होने वाले नुकसान को भी बताएं

झांसी। रविवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार द्वारा गौशालाओं में गौवंश के लिये भूसा एवं चारा की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के संबंध में वर्चुअल बैठक की गई। जिलाधिकारी ने वर्चुअल बैठक में समस्त अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि गर्मी के मद्देनजर यदि गौशालाओं में गोवंश की भूख प्यास से यदि मृत्यु होती है तो सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा गोवंश की सुरक्षा शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है,अतः गोवंश की सुरक्षा के लिए सभी इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। जिलाधिकारी ने वर्चुअल मीटिंग में भूसा की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के बारे में बताया कि वर्तमान में गेहूं, मटर एवं चना की कटाई चल रही है एवं किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध होगा। गोवंश हेतु उपरोक्त भूसा किसानों से प्राप्त करने हेतु प्रथम तरीका यह अपनाया जाये कि सम्बन्धित पशु चिकित्साधिकारी अपने क्षेत्र के खण्ड विकास अधिकारी एवं तहसीलदार से समन्वय स्थापित करें। सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी एवं तहसीलदार अपने क्षेत्र के बडे़ किसानों की सूची तैयार कर लें एवं खण्ड विकास अधिकारी, तहसीलदार एवं पशु चिकित्साधिकारी बड़े किसानों से भूसा गोवशं के लिये दान देने हेतु अपील करें। भूसा दान देने वाले किसानों को सम्मानित भी करना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि यदि अपील के उपरान्त भी बड़े कृषकों द्वारा भूसा उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो दूसरा तरीका यह अपनाया जाए कि गोशाला में उपलब्ध गोबर से तैयार उर्वरक किसानों को देकर उनसे भूसा प्राप्त करने का प्रयास करें। यदि इसके उपरान्त भी भूसा प्राप्त नहीं होता है तो वे भरण-पोषण मद से भूसा को कृषकों से खरीदेंगे। उन्होंने कहा कि आगामी चार दिवसों में वे किसानों से भूसा प्राप्त कर लें तथा अक्टूबर/नवम्बर माह तक के लिये भूसा का संग्रह कर लें। उन्होंने निर्देश दिये कि इस संबंध में एक अभियान चलाया जाये एवं सम्बन्धित उप जिलाधिकारी द्वारा खण्ड विकास अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय एवं यदि आवश्कता हो तो सम्बन्धित किसी अधिकारी के साथ बैठक करना सुनिश्चित करें। बैठक में खण्ड विकास अधिकारी, बबीना द्वारा माह अक्टूबर/नवम्बर तक के लिये कृषकों से भूसा क्रय करने हेतु अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराये जाने के संबंध में उन्होंने बताया कि यदि माह अक्टूबर/नवम्बर तक के लिये भूसा खरीद कर उसका संग्रह करने के लिये धनराशि की आवश्यकता हो , तो इस संबंध में तत्काल एस्टीमेट तैयार कर प्रस्तुत करें। वर्चुअल मीटिंग में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने गोशाला में गोवंश के लिये पानी की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी/नगर निकाय के अधिशाषी अधिकारी को निर्देश दिये कि यदि गोशाला में हैण्डपम्प के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है एवं हैण्डपम्प खराब है तो उसे ठीक करा लिया जाये। यदि आवश्यकता पड़े तो टेंकर के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाये परन्तु गोशाला में पेयजल की आपूर्ति अवश्य सुनिश्चित की जाये। पेयजल के कारण कोई भी गोवशं प्रभावित/मृत्यु न हो। इसका विशेष ध्यान रखा जाए अन्यथा कार्यवाही की जाएगी। गोवंश को भूसा-पानी की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में निर्मित की जा रही नवीन गोशालाओं हेतु चिन्हित भूमि के संबंध में बताया कि मुख्य विकास अधिकारी के स्तर से उपरोक्त चिन्हित भूमि का परीक्षण किये जाने के लिये सम्बन्धित उपजिलाधिकारी/तहसीलदार को पत्र प्रेेषित किया गया है। उन्होंने निर्देश दिये कि परीक्षण के दौरान गोशाला हेतु चिन्हित भूमि तक भूसा की आपूर्ति हेतु ट्रेक्टर के पहुंचने के लिये मार्ग, विद्युत की आपूर्ति एवं पेयजल की आपूर्ति की व्यवस्था की भंलीभांति जांच करने तथा अपनी परीक्षण आख्या अविलम्ब उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। अपर जिलाधिकारी, नमामि गंगे को बैठक में निर्देशित किया गया कि उक्त कार्य का पर्यवेक्षक करना सुनिश्चित करें। बैठक में जिलाधिकारी ने गोवंश को हरे चारे की उपलब्धता हेतु नेपियर घास, कांटा रहित घास आदि उगाये जाने के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि चारागाह/बंजर/ऊसर भूमि पर घास उगाई जाये दो गौशाला के लिए भूसा का एक बेहतर विकल्प प्राप्त होगा। यदि इस प्रकार की भूमि उपलब्ध न हो तो अन्य प्रकार की शासकीय भूमि पर घास उगाई जाये। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गोशाला के साथ घास उगाने हेतु शासकीय भूमि अवश्य संबद्ध कर दी जाये एवं इस कार्य को खण्ड विकास अधिकारी/अधिशाषी अधिकारी द्वारा पर्यवेक्षण किया जाये। जिलाधिकारी ने वर्तमान की ग्रीष्म ऋतु को देखते हुये निर्देश दिये कि प्रत्येक गोशाला पर गोवशं को धूप से बचाने के लिये शैड की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होना चाहिए। इस संबंध में खण्ड विकास अधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारी द्वारा संयुक्त भ्रमण कर लिया जाये। वर्चुअल मीटिंग में जिलाधिकारी ने गोशाला को भरण पोषण की धनराशि उपलब्ध कराये जाने के संबंध में बताया कि प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह के अन्दर भरण पोषण की धनराशि उपलब्ध करा दी जाये। उन्होंने इसके लिये एक प्रक्रिया अपनाये जाने के निर्देश दिये, जिसके अन्तर्गत माह के प्रथम दिन तक समस्त गोशालाओं द्वारा अपना-अपना मांग पत्र सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी को उपलब्ध करा दी जाये। खण्ड विकास अधिकारी द्वारा उपरोक्त मांग पत्र संकलित कर माह के द्वितीय दिवस तक मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को उपलब्ध करा दी जाये। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा तत्काल पत्रावली तैयार कर प्रस्तुत की जाये। भरण पोषण हेतु धनराशि अवमुक्त होने पर मुख्य पशुचिकित्साधिकारी द्वारा सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी धनराशि उपलब्ध करा दी जाये एवं खण्ड विकास अधिकारी को धनराशि प्राप्त होने पर दो कार्य दिवसों के अन्दर धनराशि सम्बन्धित गोशाला को उपलब्ध करा दी जाये। इसमें किसी भी अधिकारी द्वारा शिथिलता न बरती जाये। वर्चुअल मीटिंग में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी समस्त उपजिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने मीटिंग में प्रतिभाग किया।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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